Etawah News: आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कृषि कानून बापस होने पर किसानों के साथ जश्न 

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संवाददाता महेमनायश कुमार
इटावा: लगभग 1 वर्ष तक चले तीनों काले कृषि कानूनों के खिलाफ संयुक्त किसानों के आंदोलन ने आखिर मोदी जी के घमंड को चकनाचूर कर दिया और मजबूर कर दिया कि कृषि कानून वापस लिए जाएं। किसानों के अस्तित्व को मिटाने की कोशिश करने वाली भाजपा को आगामी चुनावों में अपना ही अस्तित्व खतरे में नज़र आने लगा था।
700 से अधिक आंदोलनकारी किसानों की शहादत का परिणाम है कि आज प्रधानमंत्री जी को अपने कदम वापस लेने पड़े हैं।

निश्चित रूप से यह आंदोलनकारी किसानों की ऐतिहासिक जीत है तथा जनतंत्र की रक्षा में यह जीत एक मील का पत्थर साबित होगी। भविष्य में जब इसका इतिहास लिखा जाएगा तो एक और जहां भाजपा मोदी सरकार की किसान विरोधी क्रूरता और लोकतंत्र विरोधी कार्यवाहियाँ होंगी वही आंदोलन की राह में लगभग 1 वर्ष डटे रहे आंदोलनकारी किसानों का इतिहास लिखा जायेगा।

आम आदमी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष इक़रार अहमद ने भारत सरकार से मांग करते हुये कहा कि शहीद किसानों को शहीदी का दर्जा देकर परिजनों को एक करोड़ रूपया एवं एक सरकारी नौकरी दी जाए। एमएसपी की गारंटी निश्चित की जाये।तीनों काले कृषि कानूनों का पार्लियामेंट में वापस किये जायें तथा वीज बिल बिजली बिल पर सरकार की राय आना बेहद जरूरी है। उद्योगपतियों के हित के लिए बनाए गए इन कानूनों की वापसी की घोषणा ने निश्चित रूप से किसान आंदोलन एवं उसके समर्थकों में एक नई ऊर्जा का संचार किया है ।

जिला अध्यक्ष संजीव शाक्य ने कहा कि कुंभकरण 6 महीने में जगता था पर भारत सरकार को जगने में पूरा 1 वर्ष लग गया। किसानों को सर्दी,गर्मी और बरसात के साथ पुलिस के लाठी- डंडे,पानी की बौछार, रास्ते अवरुद्ध करके, कीलें लगाकर किसानों को परेशान किया गया। प्रधानमंत्री जी को किसानों से प्यार नहीं, कृषि प्रधान देश की आबादी के 72% किसानों के साथ अन्याय करते रहे और अब सत्ता के लालच में पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों में हार के डर से फैसला वापस लिया गया है। आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गांव, गांव जाकर किसानों के साथ जश्न मनायेंगे।

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