Bihar News: मुकुंदपुर में ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली

राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के अंतर्गत संचालित आरपीसीएयू कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली द्वारा राजापाकर प्रखंड के मुकुंदपुर गांव में ‘खेती बचाओ अभियान’ के तहत किसानों के लिए संतुलित उर्वरक के दक्ष उपयोग विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के निर्देशन में किया गया।

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कार्यक्रम का नेतृत्व कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक कुमारी नम्रता ने किया। जानकारी के अनुसार यह अभियान 1 जून 2026 से 30 जून 2026 तक जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित किया जाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को संतुलित एवं दक्ष उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना, बायोफर्टिलाइजर और ग्रीन मैन्यूरिंग को बढ़ावा देना, मिट्टी परीक्षण के महत्व को समझाना तथा तिलहन मिशन को प्रोत्साहित करना था। इसके अलावा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

वैज्ञानिकों ने किसानों को एल-नीनो के प्रभाव से बचाव, वैकल्पिक फसलों को अपनाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, जलवायु-अनुकूल (क्लाइमेट रेसिलियंट) फसल किस्मों के उपयोग, खाद्य तेल की खपत में कमी तथा नकली उर्वरक एवं कीटनाशकों की पहचान संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।

इस अवसर पर डॉ. सुधानंद प्रसाद लाल तथा डॉ. कौशल किशोर ने किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खेती, बायोफर्टिलाइजर एवं ग्रीन मैन्यूरिंग के लाभों के बारे में विस्तार से बताया। वैज्ञानिकों ने मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन लागत कम करने पर विशेष जोर दिया।

कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक कुमारी नम्रता ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक की जानकारी देते हुए इसके लाभ, श्रम एवं लागत में कमी तथा बेहतर उत्पादन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के बाद वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों का भ्रमण कर उन्हें तकनीकी सलाह भी दी।
कार्यक्रम के सफल संचालन में एकेआरएसपी संस्था के अमित कुमार मिश्रा, राजीव रंजन एवं अभिषेक आनंद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस दौरान मुकुंदपुर के प्रगतिशील किसान सत्येंद्र कुमार सहनी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले चार वर्षों से प्राकृतिक खेती के माध्यम से सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बिना जुताई की खेती तथा जीवामृत के नियमित उपयोग से कीट प्रकोप में कमी आई है और उत्पादन लागत भी काफी घट गई है। उनके अनुसार प्राकृतिक खेती से उन्हें प्रति वर्ष एक एकड़ भूमि से लगभग एक लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर कृषि वैज्ञानिकों से आधुनिक कृषि तकनीकों, प्राकृतिक खेती तथा उर्वरक प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

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