आजमगढ़: स्वीट ड्रीम एग्रोटेक इण्डिया लि. कम्पनी के नाम पर करोडो का मैनेजर व ऐजेन्टो ने किया घोटाला

Azamgarh: Sweet Dream Agrotech India Ltd. crores in the name of the company Manager and agent did scam

Azamgarh: Sweet Dream Agrotech India Ltd. crores in the name of the company Manager and agent did scam

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संवाददाता -रवीन्द्र नाथ गुप्ता

आजमगढ़ जिले के तहसील सगड़ी क्षेत्र के निकट थाना महाराजगंज क्षेत्र मे कटान बाजार पर से लगभग 1कि0मी0 पश्चीम तरफ के कन्हैया लाल पुत्र परदेशी ग्राम सभा देवारा कदीम स्थाई निवासी है। यह स्वीट ड्रीम एग्रोटेक इंडिया लिमिटेड कंपनी का सीनियर मैनेजर पद पर कार्यरत था। इन्होंने अपने साथ अपने ग्रुप में लगभग 10 से 12एजेंट बनाए थे। इनके एजेंटों ने गांव में घर-घर जाकर गरीबों को बहला-फुसलाकर कंपनी के नाम पर हजारों रुपए की महीना की किस्त बनाकर लगभग 5 साल तक पैसा वसूल किए। इन्होंने गरीब मजलूम शोषित वंचितों को डबल पैसे के नाम पर ठगने का काम किए। कुछ दिनों बाद कंपनी के मैनेजर कन्हैया लाल के कहने पर अपने सभी एजेंटों को बुलवाया और बोला कि जितने सभी सदस्य इस कम्पनी मे जुडे हुए है।आप लोग सब से बोल दीजिए की कंपनी भाग गई है।कन्हैया के इशारों पर उनके चमचों ने घर जा जाकर व फोन के माध्यम से सबको यह सूचना दिए।तब यह सूचना पाकर इस कम्पनी के सभी सदस्यो ने अपने अपने एजेन्टो से वह लोग अपनी दी गई रकम वापीस मागने लगे,तो वही स्वीट ड्रीम एग्रोटेक इंडिया लिमिटेड कंपनी का सीनियर मैनेजर कन्हैया लाल व इनके कम्पनी के ऐजेन्ट सुरेश,दुधनाथ,जितेन्द्र, जनार्दन, राकेश,बब्लु,जयहिन्द,महेन्द्र,सुबाष सहीत कई लोग इस कम्पनी के ऐजेन्ट है।जब इन लोगो से इन कंपनी के सदस्यों ने अपना पैसा वापस मांगा तो इस कंपनी के सभी कार्यकर्ता ने तारीख पे तारीख महीने पर महीना देते रहते हैं।और और कहते हैं कि जल्द ही आप सब का भुगतान कर दिया जाएगा। ऐसी अवस्था में लगभग 5 साल बीत गए अभी तक कोई गरीब परिवार पैसा नहीं पाया। कंपनी के मैनेजर कन्हैया लाल ने स्टांप पेपर पर भी लिखा लेकिन स्टांप पेपर की अवहेलना करने लगे। वही मजदूरों और गरीबों का कहना है।कि हम दिन रात मजदूरी करके जीवन अपन करते हैं।और अपने बच्चे और परिवार के भविष्य के लिए और भूखे पेट सोए और कर जरीन भी करके हम लोग इस कंपनी में पैसा जमा किए थे।
लगभग सैकड़ों की संख्या में इकट्ठा होकर लोग कंपनी के एजेंट को लेकर मैनेजर के घर पहुचे। लेकिन एजेंट की मिलीभगत से गरीबों का पैसा वापस नहीं मिला तो निराश मन अपने अपने घर को चले गए ।सूत्रों से पता चला है कि इस कंपनी में लगभग कई हजारों की संख्या में लोग इस कंपनी से जुड़े थे।और सब का पैसा इस कंपनी में जमा हुआ है।

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