Agra News: विकाश का भूगोल और सत्ता की प्राथमिकताएं: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच क्यों पीछे रह गया आगरा?

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आगरा। “विकास का भूगोल” आज की सार्वजनिक नीति और शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण अवधारणा बन चुका है। यह बताता है कि संसाधनों, निवेश और बड़ी अवसंरचनात्मक परियोजनाओं का वितरण किस प्रकार विभिन्न क्षेत्रों के बीच विकास की असमानताओं को जन्म देता है। उत्तर प्रदेश के संदर्भ में यह प्रश्न विशेष रूप से तब उभरता है, जब एक ओर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसी वैश्विक महत्वाकांक्षा वाली परियोजना विकसित हो रही है, जबकि दूसरी ओर ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से विश्व प्रसिद्ध ताजनगरी आगरा अपेक्षाकृत विकासात्मक ठहराव का अनुभव करती दिखाई देती है।

विश्वविख्यात ताजमहल की नगरी आगरा लंबे समय से पर्यटन के अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। मुगलकालीन भारत की राजधानी रहे इस शहर में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसी विश्व धरोहरें मौजूद हैं। इसके बावजूद आधुनिक औद्योगिक विकास, उच्च शिक्षा, खेल अवसंरचना, न्यायिक संस्थानों और रोजगार सृजन के क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं देती।

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मायावती सरकार का विकास मॉडल
उत्तर प्रदेश में मायावती के शासनकाल को सामाजिक न्याय और प्रतीकात्मक अवसंरचना निर्माण के लिए जाना जाता है। इस दौर में लखनऊ और नोएडा जैसे शहरों में स्मारक, पार्क और चौड़ी सड़कों का बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ। हालांकि आलोचकों का मानना है कि इस विकास मॉडल में आगरा जैसे शहरों के पर्यटन ढांचे के आधुनिकीकरण और औद्योगिक पुनरुद्धार को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल सकी।

अखिलेश यादव का एक्सप्रेसवे मॉडल
अखिलेश यादव के कार्यकाल में विकास की रणनीति एक्सप्रेसवे आधारित अवसंरचना के रूप में सामने आई। यमुना एक्सप्रेसवे ने आगरा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बीच दूरी कम कर दी, जिससे पर्यटन और यातायात में सुधार हुआ। लेकिन इस मॉडल की आलोचना यह कहकर भी की जाती है कि इसका सबसे अधिक लाभ एक्सप्रेसवे के मध्य क्षेत्रों—जैसे ग्रेटर नोएडा और जेवर—को मिला, जबकि आगरा इस विकास श्रृंखला में अपेक्षाकृत अंतिम छोर पर ही रहा।

योगी सरकार और निवेश आधारित विकास
वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने निवेश आधारित विकास रणनीति को प्राथमिकता दी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट इसी रणनीति का बड़ा उदाहरण है, जिसे उत्तर भारत के एक बड़े आर्थिक और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की परियोजनाओं में संसाधनों का केंद्रीकरण क्षेत्रीय असमानताओं को भी बढ़ा सकता है।

चुनावी राजनीति और विकास की प्राथमिकताएं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार लोकतांत्रिक राजनीति में विकास की प्राथमिकताएं अक्सर चुनावी गणित से भी प्रभावित होती हैं। जिन क्षेत्रों में जनसंख्या, राजनीतिक प्रभाव और निवेश की संभावनाएं अधिक होती हैं, वहां बड़े प्रोजेक्ट तेजी से लागू होते हैं। NCR क्षेत्र की तुलना में आगरा का राजनीतिक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होने के कारण कई बार यह शहर नीतिगत प्राथमिकताओं से पीछे रह जाता है।

पारंपरिक उद्योगों की चुनौतियां
आगरा के पारंपरिक उद्योग—जैसे चमड़ा उद्योग, संगमरमर शिल्प और हस्तशिल्प—समुचित संरक्षण और आधुनिक तकनीकी समर्थन के अभाव में कमजोर पड़ते जा रहे हैं। यदि इन क्षेत्रों में निवेश और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाता, तो यह शहर रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा केंद्र बन सकता था।
अब भी अधूरी हैं कई मांगें

आगरा के नागरिक लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, उच्च न्यायालय की खंडपीठ, अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल परिसर और उच्च शिक्षा संस्थानों की मांग करते रहे हैं। विभिन्न सरकारों ने समय-समय पर इन मांगों को लेकर घोषणाएं कीं, लेकिन कई योजनाएं अभी भी धरातल पर पूरी तरह साकार नहीं हो सकीं।
संतुलित विकास की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संतुलित विकास की नीति अपनाई जाए तो आगरा को पर्यटन आधारित स्मार्ट सिटी, औद्योगिक क्लस्टर और कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से एक मजबूत आर्थिक केंद्र बनाया जा सकता है।

अंततः “विकास का भूगोल” यह बताता है कि विकास केवल आर्थिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक और नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम भी होता है। जब तक क्षेत्रीय संतुलन और समावेशी विकास को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक आगरा जैसे शहर अपने संभावित विकास की प्रतीक्षा में खड़े रहेंगे।

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