संवाददाता : राजेन्द्र कुमार
हाजीपुर, वैशाली। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत वैशाली जिले ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिला पदाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह (भा.प्र.से.) के कुशल नेतृत्व एवं सतत अनुश्रवण के परिणामस्वरूप जिले ने टीबी मरीजों को फूड बास्केट वितरण तथा टीबी मरीजों के परिजनों को निवारक दवा (टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट) उपलब्ध कराने में पूरे बिहार में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जुलाई 2026 तक जिले में 1,776 टीबी मरीजों को फूड बास्केट वितरित किए जा चुके हैं। जिला पदाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह ने कहा कि जिले में फूड बास्केट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और किसी भी पात्र टीबी मरीज को इससे वंचित नहीं रहने दिया जाएगा।
उन्होंने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (बीडीओ) एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अपने-अपने क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पात्र टीबी मरीजों को फूड बास्केट उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करें। आवश्यकता पड़ने पर जिला स्तर से फूड बास्केट प्राप्त कर वितरण कार्य में तेजी लाई जाए।
जिला पदाधिकारी के नेतृत्व में वैशाली ने टीबी मरीजों के परिजनों को निवारक दवा उपलब्ध कराने में भी पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल किया है। वर्तमान में जिले ने इस अभियान के निर्धारित लक्ष्य का लगभग 55 प्रतिशत पूरा कर लिया है। उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि इस माह के भीतर पात्र सभी परिजनों को शत-प्रतिशत निवारक दवा उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
जिला पदाधिकारी के मार्गदर्शन में प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, आशा कार्यकर्ता, जीविका दीदी, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा घर-घर जाकर संभावित टीबी मरीजों की पहचान एवं स्क्रीनिंग का अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध डिजिटल एक्स-रे तथा समुदाय स्तर पर संचालित हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों की जांच कराई जा रही है, ताकि टीबी रोगियों की समय पर पहचान कर शीघ्र उपचार शुरू किया जा सके।
जिला पदाधिकारी श्रीमती वर्षा सिंह ने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, लगातार बुखार, वजन में कमी, रात में अत्यधिक पसीना आना अथवा टीबी के अन्य लक्षण दिखाई दें, तो वे बिना विलंब अपने निकटतम सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में निःशुल्क जांच अवश्य कराएं।
उन्होंने कहा कि टीबी का समय पर पता लगने और नियमित उपचार से यह बीमारी पूरी तरह ठीक हो सकती है। जनसहभागिता, समय पर जांच और नियमित उपचार के माध्यम से ही टीबी मुक्त वैशाली तथा टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।