Bihar News :वैशाली में बारिश से धान की फसल को नुकसान, आलू और सरसों की बुवाई भी प्रभावित
संवाददाता: राजेंद्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
बिहार के वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड क्षेत्र में शुक्रवार सुबह से ही रुक-रुककर हो रही बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश के कारण धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, आलू की बुवाई कर चुके किसानों के साथ-साथ तोड़ी और सरसों की खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
प्रखंड क्षेत्र में कई स्थानों पर खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल बारिश से प्रभावित हुई है। जिन किसानों ने धान की कटाई कर ली है, उनकी कटी हुई फसल पानी के कारण खराब होने की आशंका है। वहीं, खेतों में खड़ी धान की अधिक बढ़ी हुई फसल कई जगहों पर जमीन पर गिर गई है। इससे धान की गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है।
75 प्रतिशत धान की फसल अभी खेतों में
किसानों के अनुसार, क्षेत्र में अभी अधिकांश धान की फसल की कटाई नहीं हुई है। कम अवधि में तैयार होने वाली धान की किस्मों की कटाई लगभग 25 प्रतिशत किसानों ने ही की है, जबकि करीब 75 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी है। किसानों को इन फसलों के पूरी तरह पकने का इंतजार है। सामान्य स्थिति में इनकी कटाई में लगभग एक महीने का समय लग सकता है।

खड़ी धान की फसल को और अधिक नुकसान हो सकता है। लगातार बारिश होने से फसल गिरने, दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने और कटाई में देरी होने की आशंका है।
आलू की बुवाई करने वाले किसानों की बढ़ी परेशानी
बारिश का असर आलू की खेती पर भी पड़ने की आशंका है। जिन किसानों ने पिछले चार दिनों के दौरान आलू की बुवाई की है, उन्हें खेतों में पानी जमा होने से नुकसान का डर सता रहा है। अधिक नमी के कारण आलू के बीज सड़ने और उनके अंकुरण पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।
किसानों का कहना है कि खेतों में पर्याप्त नमी कम होने और मिट्टी के सूखकर बुवाई के अनुकूल होने के बाद ही दोबारा आलू की बुवाई शुरू की जा सकेगी। इसके लिए किसानों को करीब पांच दिन तक इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, यह अवधि मौसम और खेतों की स्थिति पर निर्भर करेगी।
तोड़ी और सरसों की बुवाई भी हो सकती है प्रभावित
क्षेत्र में इन दिनों किसान रबी सीजन की तिलहनी फसलों की बुवाई भी कर रहे हैं। इनमें तोड़ी और सरसों प्रमुख हैं। बारिश के कारण खेतों में अधिक नमी होने और मिट्टी के बैठ जाने से इन फसलों के बीजों के अंकुरण पर असर पड़ सकता है। इससे पौधों की संख्या कम होने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों के मुताबिक, यदि बुवाई के तुरंत बाद खेतों में अधिक पानी जमा हो जाता है, तो बीजों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है। इससे किसानों को दोबारा बुवाई करने की नौबत भी आ सकती है।
चक्रवाती मौसम के प्रभाव से बढ़ी चिंता
क्षेत्र में बारिश के बीच किसानों ने मौसम में आए बदलाव को लेकर चिंता जताई है। किसानों का कहना है कि बारिश कितने दिनों तक जारी रहती है, इसका सीधा असर धान की फसल और रबी की बुवाई पर पड़ेगा। यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों ने जताई चिंता

राजापाकर प्रखंड क्षेत्र के किसान शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, सीताराम सिंह, सत्यनारायण सिंह, महेश प्रसाद सिंह, शिव कुमार यादव और पंकज कुमार सहित अन्य किसानों ने बताया कि सुबह से शुरू हुई बारिश ने धान की फसल को काफी प्रभावित किया है। खेतों में खड़ी फसल गिरने और कटी हुई धान की फसल के खराब होने की आशंका बनी हुई है।
किसानों ने कहा कि धान की कटाई का समय नजदीक होने के कारण बारिश से उनकी मेहनत पर पानी फिरने का खतरा है। वहीं, आलू, तोड़ी और सरसों की बुवाई भी प्रभावित होने से आगामी फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
फिलहाल किसानों की नजर मौसम पर टिकी हुई है। बारिश जल्द थमने और खेतों से पानी निकलने पर ही फसलों को होने वाले नुकसान का वास्तविक आकलन किया जा सकेगा।