Agra News :आगरा में विज्ञान प्रदर्शनी और चल नक्षत्रशाला से छात्राओं ने जाना ब्रह्मांड का रहस्य

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संवाददाता प्रताप सिंह आजाद

आगरा। विद्यार्थियों में वैज्ञानिक चेतना विकसित करने, जिज्ञासा एवं तार्किक चिंतन को प्रोत्साहित करने तथा पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ने के उद्देश्य से बल्केश्वर स्थित गणेश राम नागर सरस्वती बालिका विद्या मंदिर में विज्ञान प्रदर्शनी, विज्ञान के रोचक प्रयोगों और चल नक्षत्रशाला से संबंधित ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने विज्ञान के विभिन्न प्रयोगों का अवलोकन किया और विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी के माध्यम से अपनी रचनात्मकता, वैज्ञानिक समझ तथा नवाचार की प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं, चल नक्षत्रशाला के माध्यम से उन्हें ब्रह्मांड, ग्रहों, तारों और नक्षत्रों की अद्भुत दुनिया को करीब से समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान विद्यालय परिसर ज्ञान, जिज्ञासा और उत्साह से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को विज्ञान के सिद्धांतों से परिचित कराने के साथ उनमें प्रश्न पूछने, तर्क करने और प्रयोगों के माध्यम से सीखने की प्रवृत्ति विकसित करना था।
वैज्ञानिकों ने छात्राओं को किया प्रेरित

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कार्यक्रम में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, उत्तर प्रदेश शासन के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी श्री महादेव पांडे की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन में विज्ञान के महत्व और वैज्ञानिक सोच विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्राओं को अपने आसपास घटित होने वाली घटनाओं के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों को समझने तथा जिज्ञासु बने रहने के लिए प्रेरित किया।
विज्ञान शिक्षा एवं नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले श्री बृजेश दीक्षित, एमएससी, बीएड, पूर्व प्रधानाचार्य, श्री नारायण इंटर कॉलेज, बड़ेरा, औरैया ने भी छात्राओं को विज्ञान, ब्रह्मांड, ग्रहों और तारों से संबंधित रोचक जानकारियां दीं। अन्वेषिका (Go & Go), ग्लोबल साइंस VIPNET क्लब तथा विज्ञान भारती से जुड़े रहे श्री दीक्षित ने तारामंडल से संबंधित विभिन्न जानकारियां साझा कीं।
उन्होंने बताया कि विज्ञान केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अवलोकन, प्रयोग, विश्लेषण और निरंतर खोज के माध्यम से जीवन की अनेक समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। उनके विचारों से छात्राओं को विज्ञान के व्यावहारिक महत्व को समझने की प्रेरणा मिली।

विज्ञान के चमत्कारों ने बढ़ाई जिज्ञासा
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण श्री जितेंद्र कुमार सिंह की ओर से प्रस्तुत विज्ञान के चमत्कार रहे। उन्होंने विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों और प्रदर्शनों के माध्यम से विज्ञान के सिद्धांतों को सरल, रोचक और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया। इन प्रयोगों को देखकर छात्राओं में उत्सुकता बढ़ी और उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि आश्चर्यजनक दिखाई देने वाली घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक नियम और तर्क कार्य करते हैं।

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प्रस्तुति के माध्यम से छात्राओं को किसी भी घटना को केवल आश्चर्य के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे के कारणों को जानने, सवाल पूछने और प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित किया गया। इस गतिविधि ने छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चल नक्षत्रशाला में जाना ब्रह्मांड का रहस्य
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण चल नक्षत्रशाला रही। तारामंडल गोरखपुर के श्री अशोक कुमार मिश्रा तथा चल नक्षत्रशाला के सहायक श्री अली इम्तियाज और श्री रावत के सहयोग से छात्राओं को ब्रह्मांड की विशालता और खगोलीय घटनाओं को समझने का अवसर मिला।
चल नक्षत्रशाला के माध्यम से छात्राओं ने ग्रहों, तारों, नक्षत्रों और सौरमंडल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं। अंतरिक्ष की विशालता और खगोलीय पिंडों से संबंधित रोचक तथ्यों ने उनकी जिज्ञासा को नई दिशा दी। जिन विषयों को छात्राएं सामान्यतः पुस्तकों और चित्रों के माध्यम से पढ़ती हैं, उन्हें अनुभवात्मक तरीके से समझना उनके लिए उत्साहजनक रहा।
इस गतिविधि ने अनुभव आधारित शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों को रोचक ढंग से प्रस्तुत कर छात्राओं की विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने में योगदान दिया।
विशेषज्ञ निर्णायक मंडल ने किया विज्ञान मॉडलों का मूल्यांकन
कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं की ओर से तैयार किए गए विज्ञान मॉडलों का मूल्यांकन विशेषज्ञ निर्णायक मंडल ने किया। निर्णायक मंडल में डॉ. सौरभ निषाद, प्रधानाचार्य, यूनिवर्सिटी मॉडर्न स्कूल; श्री प्रमोद श्रीवास्तव, पीजीटी, एसवीएम; डॉ. ऋचा गुप्ता, वैज्ञानिक, डीआरडीओ तथा श्रीमती राधा बंसल शामिल रहीं, जिन्हें आईटी क्षेत्र का विशेषज्ञता अनुभव प्राप्त है।
निर्णायकों ने छात्राओं के मॉडलों की वैज्ञानिक अवधारणा, रचनात्मकता, उपयोगिता और प्रस्तुतीकरण का आकलन किया। उन्होंने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें अपने विचारों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और वैज्ञानिक सोच को व्यवहार में उतारने के लिए प्रोत्साहित किया।
छात्राओं ने अपने मॉडलों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया कि जिज्ञासा, कल्पनाशक्ति और निरंतर प्रयास से नए विचारों को उपयोगी स्वरूप दिया जा सकता है।
वरिष्ठ वर्ग में इन छात्राओं ने मारी बाजी
विज्ञान मॉडल प्रतियोगिता के वरिष्ठ वर्ग में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर परिणाम इस प्रकार रहे।
प्रथम स्थान: अंशिका, कक्षा 9
द्वितीय स्थान: कृतिका गुप्ता, कक्षा 12
तृतीय स्थान: वैष्णवी सिसोदिया, कक्षा 9-B
सांत्वना पुरस्कार: वैष्णवी पाल, कक्षा 11-E
सांत्वना पुरस्कार: कनक, कक्षा 9-B
कनिष्ठ वर्ग में इन छात्राओं को मिला पुरस्कार
कनिष्ठ वर्ग में भी छात्राओं ने अपनी वैज्ञानिक समझ और रचनात्मकता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे।
प्रथम स्थान: आरोही जायसवाल, कक्षा 7-D
द्वितीय स्थान: तृप्ति, कक्षा 8-B
तृतीय स्थान: राशिका पाल, कक्षा 6-A
सांत्वना पुरस्कार: हर्षानी टंडन, कक्षा 6-A
सांत्वना पुरस्कार: ईशा सिंह, कक्षा 7-B
प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली सभी छात्राओं को पुरस्कृत कर बधाई दी गई। साथ ही, प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अन्य छात्राओं के प्रयासों की भी सराहना की गई। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और निरंतर सीखने की भावना विकसित करने में सहायक होती हैं।
श्रीमती रेखा अग्रवाल ने किया कार्यक्रम का संचालन
समूचे कार्यक्रम का सुव्यवस्थित एवं प्रभावशाली संचालन श्रीमती रेखा अग्रवाल, पीजीटी हिंदी ने किया। उन्होंने अतिथियों के परिचय, वैज्ञानिक प्रस्तुतियों, चल नक्षत्रशाला, विज्ञान मॉडल मूल्यांकन और पुरस्कार वितरण सहित कार्यक्रम के सभी चरणों को सहजता और गरिमा के साथ आगे बढ़ाया।
उनके प्रभावशाली मंच संचालन ने कार्यक्रम को क्रमबद्ध और रोचक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती चारू पटेल के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन से कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने छात्राओं के सर्वांगीण विकास में विज्ञान, प्रयोगात्मक शिक्षा, नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों की महत्ता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्राओं को पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर अनुभव के माध्यम से सीखने और अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की सभी आचार्या बहनों का सहयोग एवं योगदान सराहनीय रहा। सभी ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आयोजन की व्यवस्थाओं, छात्राओं के मार्गदर्शन और कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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वैज्ञानिक सोच विकसित करने का दिया संदेश
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों, निर्णायक मंडल, विज्ञान विशेषज्ञों, शिक्षकगण, आचार्या बहनों, छात्राओं तथा आयोजन से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
विज्ञान के प्रयोगों, विशेषज्ञों के अनुभवों, मॉडल प्रदर्शनी और चल नक्षत्रशाला के माध्यम से छात्राओं को यह समझने का अवसर मिला कि वैज्ञानिक प्रगति का आधार जिज्ञासा, तर्क, प्रयोग और निरंतर खोज है।

यह आयोजन छात्राओं के लिए ज्ञान, अनुभव और प्रेरणा का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने उन्हें केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित न रहकर सवाल पूछने, नए विचार विकसित करने और समस्याओं के समाधान खोजने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस प्रकार के शैक्षिक आयोजन विद्यार्थियों को वैज्ञानिक चेतना से संपन्न, तार्किक, रचनात्मक और उत्तरदायी नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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