विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : वर्तमान परिवेश में पर्यावरणीय जागरूकता की आवश्यकता

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सुनील पांडय : कार्यकारी संपादक

वर्तमान परिवेश में कोरोनावायरस जैसे वैश्विक महामारी को देखते हुए पर्यावरणीय जागरूकता की परम आवश्यकता है। प्रकृति ने मुफ्त में हमें सब कुछ उपहार में दिया था और उसके बदले हमने प्रकृति को क्या दिया यह सोचनीय विषय है। जब-जब हमें मौका मिला हमने प्रकृति का भरपूर दोहन ही किया उसके साथ जरा भी रियायत नहीं बरती।

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जिसका दुष्परिणाम है कि आज हम इस स्थित में पहुंच गए हैं की पर्यावरण बचाने के लिए पर्यावरणीय जागरूकता पर बल देना पड़ रहा है।यदि हम पहले ही चेत गए होते तो आज यह विषम स्थित ना आती, हमें पर्यावरणीय जागरूकता के लिए प्रचार प्रसार ना करना होता । यह हमारे द्वारा की की गई गलतियों का ही दुष्परिणाम है जो आज हम भुगत रहे हैं । यदि समय रहते अभी भी हम ना संभले तो भविष्य में इसका भयंकर दुष्परिणाम होगा। हमारी आने वाली पीढ़ियां हमारे किए की सजा भुगतेंगी । आज जिस गति से हमारे देश एवं विश्व की जनसंख्या बढ़ रही है
इसकी आवश्यकता की पूर्ति के लिए उत्पादन क्रिया में तीव्र विकास, संसाधनों का अधिकतम दोहन ,औद्योगिकरण एवं नगरीकरण आदि के फलस्वरूप पर्यावरण संबंधी विकराल समस्याएं हमारे समक्ष आ खड़ी हुई हैं ,जिससे हमारा अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। इन सबके चलते पर्यावरणीय जागरूकता की महती आवश्यकता है।

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आज विकसित देश जैसे अमेरिका,ब्रिटेन ,फ्रांस,रूस ,स्पेनएवं जापान आदि पर्यावरण अध्ययन नियमन के प्रति सर्वाधिक जागरूक हैं ,क्योंकि उन्हीं देशों में पर्यावरण की सर्वाधिक उपेक्षा हुई है। इन सब के परिणामस्वरूप विभिन्न पश्चिमी देशों में अब स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि वहां पीने के लिए शुद्ध पानी , सांस लेने के लिए शुद्ध हवा ,खाने के लिए शुद्ध भोजन और खेती के लिए शुद्ध मिट्टी का आभाव सा होने लगा है।

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कमोबेश भारत में भी लगभग यही स्थित है हमें इस सच को स्वीकार करना होगा । पर्यावरण की इन्हीं समस्याओं ने हमें पर्यावरण को शुद्ध रखने ,अपनी क्रियाओं पर ध्यान देने ,इन्हें समझने – बूझने एवं नियमों के तहत जीवन यापन करने के लिए प्रेरित किया है। यह एक विडंबना ही है कि आज के इस आधुनिक भौतिकवादी युग को विज्ञान एवं तकनीकी युग के नाम से संबोधित किया गया है, जबकि प्रकृति के खिलाफ सर्वाधिक विनाशकारी कार्य इसी युग में हुए हैं ,जिसने हमारे पर्यावरण को सर्वाधिक हानि पहुंचाई है।

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वर्तमान युग में वन विनाश ,खनिज उत्खनन ,आयुधों नाभिकीय तापगृहों ,कल- कारखानों ,सिंचाई के साधनों , यातायात के मार्गों के कारण भी पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचा है। इन समस्त समस्याओं को कैसे सुलझाया जाए इसके लिए पर्यावरणीय जागरूकता की अत्यंत आवश्यकता है। इसके लिए हमसब मिलकर प्रयास भी कर रहे हैं लेकिन यह कितना सफल होगा इस विषय में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी ।

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