*संघ ने जिलेभर में‌ किया खिचडी कार्यक्रम* संभल से भूपेंद्र सिंह *संभल* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सम्पूर्ण जिलेभर में खिचडी कार्यक्रम किया गया। संघ के जिला प्रचार प्रमुख विजय ने जानकारी दी कि खिचडी कार्यक्रम पूरे जिलेभर में 80 से ज्यादा हुये हैं। उन्होने बताया कि समाज से छुआछूत और रूढ़ियों को समाप्त कर समरसता एवं स्वाभिमान जगाने का पर्व है मकर संक्रांति। यह पर्व अपने अंदर चेतना जगाने और भारत को पुन: परम वैभव बनाने का संकल्प लेने का है। विभिन्न जातियों में बंटे हिन्दू समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। कहा कि जब तक हिन्दू समाज संगठित नहीं होगा, भारत माता के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराते रहेंगे। कहा कि डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने समाज में जिन गुणों की आवश्यकता का अनुभव किया उन्हीं के अनुरूप उत्सवों की योजना की। प्रत्येक उत्सव किसी विशेष गुण की ओर इंगित करता है। मकर संक्रांति को ही स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। बताया कि मकर संक्रांति का उत्सव कई देशों में मनाया जाता है। कहीं इसे संक्रान्ति कहीं पोंगल के नाम से जाना जाता है। उन्होने बताया कि मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्त्व है. ज्योतिष विज्ञान ये मानता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है. मकर संक्रांति के दिन घी-तिल-कंबल-खिचड़ी दान का खास महत्व है. पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में यह समय नई फसल काटने का होता है. इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है. मकर संक्रांति के दिन सिर्फ खिचड़ी ही नहीं, तिल से जुड़े दान और प्रयोग भी लाभ देते हैं. दरअसल, ये मौसम में परिवर्तन का समय होता है. ऐसे में तिल का प्रयोग विशेष हो जाता है. साथ ही मकर संक्रांति सूर्य और शनि से लाभ लेने का भी खास दिन होता है. मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. शास्त्रों में उत्तरायण के समय को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है. सम्भल नगर में प्रेमशंकर,सम्भल खण्ड में भूकेन्द्र ,पंवासा में जगतवीर युवराज, असमोली में सुभाष गौरव, हनुमान नगर खण्ड में लोकेश, चंदौसी नगर में चरनसिंह,बनियाखेडा खण्ड में सुमित के नेतृत्व में यह कार्यक्रम किये गये।
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संभल समाचार : संघ ने जिलेभर में‌ किया खिचडी कार्यक्रम

संभल से भूपेंद्र सिंह :संभल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सम्पूर्ण जिलेभर में खिचडी कार्यक्रम किया गया। संघ के जिला प्रचार प्रमुख विजय ने जानकारी दी कि खिचडी कार्यक्रम पूरे जिलेभर में 80 से ज्यादा हुये हैं। उन्होने बताया कि समाज से छुआछूत और रूढ़ियों को समाप्त कर समरसता एवं स्वाभिमान जगाने का पर्व है मकर संक्रांति। यह पर्व अपने अंदर चेतना जगाने और भारत को पुन: परम वैभव बनाने का संकल्प लेने का है।

*संघ ने जिलेभर में‌ किया खिचडी कार्यक्रम* संभल से भूपेंद्र सिंह *संभल* राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा सम्पूर्ण जिलेभर में खिचडी कार्यक्रम किया गया। संघ के जिला प्रचार प्रमुख विजय ने जानकारी दी कि खिचडी कार्यक्रम पूरे जिलेभर में 80 से ज्यादा हुये हैं। उन्होने बताया कि समाज से छुआछूत और रूढ़ियों को समाप्त कर समरसता एवं स्वाभिमान जगाने का पर्व है मकर संक्रांति। यह पर्व अपने अंदर चेतना जगाने और भारत को पुन: परम वैभव बनाने का संकल्प लेने का है। विभिन्न जातियों में बंटे हिन्दू समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। कहा कि जब तक हिन्दू समाज संगठित नहीं होगा, भारत माता के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराते रहेंगे। कहा कि डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने समाज में जिन गुणों की आवश्यकता का अनुभव किया उन्हीं के अनुरूप उत्सवों की योजना की। प्रत्येक उत्सव किसी विशेष गुण की ओर इंगित करता है। मकर संक्रांति को ही स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। बताया कि मकर संक्रांति का उत्सव कई देशों में मनाया जाता है। कहीं इसे संक्रान्ति कहीं पोंगल के नाम से जाना जाता है। उन्होने बताया कि मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्त्व है. ज्योतिष विज्ञान ये मानता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है. मकर संक्रांति के दिन घी-तिल-कंबल-खिचड़ी दान का खास महत्व है. पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में यह समय नई फसल काटने का होता है. इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है. मकर संक्रांति के दिन सिर्फ खिचड़ी ही नहीं, तिल से जुड़े दान और प्रयोग भी लाभ देते हैं. दरअसल, ये मौसम में परिवर्तन का समय होता है. ऐसे में तिल का प्रयोग विशेष हो जाता है. साथ ही मकर संक्रांति सूर्य और शनि से लाभ लेने का भी खास दिन होता है. मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. शास्त्रों में उत्तरायण के समय को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है. सम्भल नगर में प्रेमशंकर,सम्भल खण्ड में भूकेन्द्र ,पंवासा में जगतवीर युवराज, असमोली में सुभाष गौरव, हनुमान नगर खण्ड में लोकेश, चंदौसी नगर में चरनसिंह,बनियाखेडा खण्ड में सुमित के नेतृत्व में यह कार्यक्रम किये गये।

विभिन्न जातियों में बंटे हिन्दू समाज को एकजुट होने की आवश्यकता है। कहा कि जब तक हिन्दू समाज संगठित नहीं होगा, भारत माता के अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडराते रहेंगे। कहा कि डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार ने समाज में जिन गुणों की आवश्यकता का अनुभव किया उन्हीं के अनुरूप उत्सवों की योजना की।

प्रत्येक उत्सव किसी विशेष गुण की ओर इंगित करता है। मकर संक्रांति को ही स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था। बताया कि मकर संक्रांति का उत्सव कई देशों में मनाया जाता है। कहीं इसे संक्रान्ति कहीं पोंगल के नाम से जाना जाता है।
उन्होने बताया कि मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है. मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्य की उपासना करने का विशेष महत्त्व है. ज्योतिष विज्ञान ये मानता है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान सौ गुना फल देता है. मकर संक्रांति के दिन घी-तिल-कंबल-खिचड़ी दान का खास महत्व है।

पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में यह समय नई फसल काटने का होता है. इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है।

मकर संक्रांति के दिन सिर्फ खिचड़ी ही नहीं, तिल से जुड़े दान और प्रयोग भी लाभ देते हैं. दरअसल, ये मौसम में परिवर्तन का समय होता है. ऐसे में तिल का प्रयोग विशेष हो जाता है. साथ ही मकर संक्रांति सूर्य और शनि से लाभ लेने का भी खास दिन होता है. मकर संक्रांति के दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं. शास्त्रों में उत्तरायण के समय को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा गया है.
सम्भल नगर में प्रेमशंकर,सम्भल खण्ड में भूकेन्द्र ,पंवासा में जगतवीर युवराज, असमोली में सुभाष गौरव, हनुमान नगर खण्ड में लोकेश, चंदौसी नगर में चरनसिंह,बनियाखेडा खण्ड में सुमित के नेतृत्व में यह कार्यक्रम किये गये।