संवाददाता : राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
कृषि कार्यालय किसान भवन, बसरा परिसर में गुरुवार को प्रखंड स्तरीय शारदीय खरीफ महोत्सव कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष अवधेश राय, प्रखंड कृषि पदाधिकारी आनंद मौर्य, उद्यान पदाधिकारी मनोज कुमार, आत्मा अध्यक्ष वीर चंद्र प्रसाद सिंह, कृषि समन्वयक सुबोध कुमार, बीपीएम राजकुमार शाह, दरोगा पासवान तथा जैविक किसान तेज नारायण सिंह ने संयुक्त रूप से किया।

कार्यक्रम में प्रखंड की विभिन्न पंचायतों से आए दर्जनों महिला एवं पुरुष प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इस अवसर पर किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, आधुनिक खेती की तकनीकों तथा सरकारी अनुदान संबंधी जानकारियां दी गईं।
प्रखंड कृषि पदाधिकारी आनंद मौर्य ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि किसान पंजीकरण (फार्मर रजिस्ट्रेशन) का कार्य प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में चल रहा है। जिन किसानों का अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है, वे जल्द से जल्द अपना पंजीकरण करा लें, अन्यथा कृषि विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा।
उन्होंने कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत अनुदानित दर पर कृषि उपकरण खरीदने की जानकारी दी। साथ ही पशुपालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में भी किसानों को अवगत कराया। किसानों को मिट्टी जांच के आधार पर खेती करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
तकनीकी प्रबंधक रौनी कुमार ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। उन्होंने किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक खेती अपनाने, उन्नत एवं हाइब्रिड बीजों का प्रयोग करने तथा श्री विधि से धान की खेती करने की सलाह दी।
कार्यक्रम में किसानों को बताया गया कि बिहार कृषि ऐप के माध्यम से बीज अनुदान, कृषि यंत्रों तथा निजी नलकूप (बोरिंग) योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि पात्र किसानों को बोरिंग योजना के तहत सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
प्रखंड बीस सूत्री अध्यक्ष अवधेश राय ने कहा कि पंचायत स्तर पर कार्यरत कृषि सलाहकारों को किसानों के बीच जाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी देनी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक किसान इन योजनाओं का लाभ उठा सकें।
कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याएं भी सुनी गईं तथा कृषि विशेषज्ञों द्वारा उनके समाधान संबंधी सुझाव दिए गए।