संवाददाता : विशाल बाबू
बसरेहर (इटावा)। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक महिला की मौत ने बसरेहर क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर परिजन उपचार में लापरवाही और बाहर से इंजेक्शन मंगवाकर लगाए जाने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में संचालित मेडिकल स्टोरों की कार्यप्रणाली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। घटना के बाद लोगों के बीच एक ही सवाल गूंज रहा है—आखिर एक प्रसूता की जान कैसे चली गई?
ग्राम बिहारीपुर निवासी 30 वर्षीय राधिना पत्नी विपिन कुमार को प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बसरेहर में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान बाहर से इंजेक्शन मंगवाकर लगाया गया, जिसके बाद महिला की हालत बिगड़ने लगी। परिजनों के अनुसार कुछ ही समय में उसे खुजली, घबराहट और बेचैनी की शिकायत हुई तथा स्थिति गंभीर हो गई। बाद में उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी।
इस घटना ने एक और महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में कई मेडिकल स्टोर ऐसे संचालित हो रहे हैं, जिनकी वैधता और मानकों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। यदि किसी मरीज को अस्पताल के बाहर से दवा या इंजेक्शन मंगवाया गया है, तो उसकी जांच भी उतनी ही आवश्यक है जितनी मौत के कारणों की।
फिलहाल पूरे मामले की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी हैं। लेकिन एक गरीब मजदूर परिवार की इस त्रासदी ने स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, जवाबदेही और व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद सच सामने आता है या यह मामला भी फाइलों में सिमटकर रह जाता है।