Agra News : आगरा में 8 से 10 अक्टूबर तक होगा पितृ पक्ष महोत्सव 2026, श्रद्धा और संस्कार का बनेगा संगम
संवाददाता मुस्कान सिंह आजाद
आगरा। पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सनातन परंपराओं के संरक्षण के उद्देश्य से दिव्य मंथन फाउंडेशन की ओर से तीन दिवसीय ‘पितृ पक्ष महोत्सव 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह महोत्सव 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक यमुना तट, बल्केश्वर स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर परिसर में आयोजित होगा।
महोत्सव में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आयोजन के दौरान पितृ तर्पण, श्राद्ध एवं पिंडदान, नारायण बलि, पितृ शांति अनुष्ठान, हवन-पूजन के साथ भागवत मूल पाठ कथा का भी आयोजन होगा। आयोजकों के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य लोगों को पितरों के प्रति श्रद्धा और सनातन संस्कारों से जोड़ना है।

भागवताचार्य पं. प्रिया किशोरी देंगी मार्गदर्शन
महोत्सव के प्रमुख वक्ता एवं भागवताचार्य के रूप में पं. प्रिया किशोरी जी का मार्गदर्शन रहेगा। वहीं मोनिका कौशल जी, वास्तु कंसल्टेंट, आयोजन में मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। तीन दिनों तक धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को पितृ स्मरण एवं भारतीय परंपराओं से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
विभिन्न सहयोगियों का रहेगा योगदान
आयोजन को सफल बनाने में दिव्य मंथन के संस्थापक श्री विकास रायजादा, श्री महालक्ष्मी मंदिर के ट्रस्टी श्री राम कपूर, श्री आशीष सक्सेना, डी.जी. आरोही इवेंट के श्री हर्ष गुलाटी, श्रीमती राखी अग्रवाल, श्री अमित चौहान (ब्लेसिंग फाउंडेशन), श्री संदीप पांडे एवं अधिवक्ता श्री संतोष धाकरे सहित विभिन्न सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

तीन दिन चलेगा आयोजन
आयोजकों के मुताबिक 8 से 10 अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव में श्रद्धालु पितरों की स्मृति में धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल हो सकेंगे। यमुना तट स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर परिसर में होने वाले इस आयोजन को श्रद्धा, सेवा और संस्कार के संगम के रूप में आयोजित किया जा रहा है।
आयोजन विवरण:
आयोजन: पितृ पक्ष महोत्सव 2026
दिनांक: 8 से 10 अक्टूबर 2026
स्थान: श्री महालक्ष्मी मंदिर, यमुना तट, बल्केश्वर, आगरा
आयोजक: दिव्य मंथन
संस्थापक: श्री विकास रायजादा
मुख्य वक्ता: पं. प्रिया किशोरी जी, भागवताचार्य
मार्गदर्शन: मोनिका कौशल जी, वास्तु कंसल्टेंट
प्रमुख कार्यक्रम: पितृ तर्पण, श्राद्ध-पिंडदान, नारायण बलि, पितृ शांति अनुष्ठान, हवन-पूजन एवं भागवत मूल पाठ कथा