Agra News :वैशाली के भाथादासी मध्य विद्यालय में बच्चों ने छठ महापर्व की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की
संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर (वैशाली)। बिहार के लोकआस्था के महापर्व छठ की सांस्कृतिक छटा अब विद्यालयों में भी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में वैशाली जिले के राजापाकर प्रखंड क्षेत्र की राजापाकर उत्तरी पंचायत स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय भाथादासी दक्षिणी के परिसर में बच्चों ने छठ महापर्व पर आधारित एक आकर्षक झांकी प्रस्तुत की। शिक्षक अनिल कुमार के मार्गदर्शन और प्रधानाध्यापक के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में बच्चों ने छठ पूजा की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता को खूबसूरती से प्रदर्शित किया।
झांकी के माध्यम से बच्चों ने बिहार की सांस्कृतिक पहचान और लोक परंपराओं को जीवंत किया। इसमें छठ पूजा की पवित्रता, अनुशासन, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामूहिक सहयोग की भावना को दर्शाया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के शिक्षक और बच्चे एक-दूसरे का सहयोग करते नजर आए।

इस अवसर पर शिक्षक अनिल कुमार ने कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति, परंपरा और नैतिक मूल्यों का ज्ञान कराना भी बेहद जरूरी है। आज शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य क्षेत्रों में विशेषज्ञ तो बन रहे हैं, लेकिन एक अच्छा इंसान बनाने वाली शिक्षा पर भी उतना ही ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं हमारी शिक्षा व्यवस्था में नैतिकता, मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कारों को मजबूत करने की जरूरत है। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा के साथ मानवता, नैतिकता, एकता और आपसी सहयोग का पाठ पढ़ाने का प्रयास किया जाता है, ताकि वे भविष्य में अच्छे इंसान बनने के साथ-साथ जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें।
अनिल कुमार ने कहा कि छठ महापर्व केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह पवित्रता, अनुशासन, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है। इस पर्व में जाति-पाति, ऊंच-नीच और धर्म के भेदभाव को भुलाकर सभी लोग एक साथ मिलकर पूजा-अर्चना करते हैं। प्रकृति और सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला यह पर्व समाज को आपसी सद्भाव और एकजुटता का संदेश देता है।
उन्होंने बताया कि इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों से बच्चों में सहयोग की भावना, आत्मअनुशासन, रचनात्मकता और सामाजिक व्यवहार जैसे गुणों का विकास होता है। साथ ही बच्चे अपनी सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझते हैं और अपनी परंपराओं से जुड़ते हैं।
छठ महापर्व का है प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
छठ पूजा भारत के प्राचीन और पवित्र वैदिक पर्वों में से एक मानी जाती है। यह पर्व मुख्य रूप से भगवान सूर्य और छठी मैया की उपासना के लिए मनाया जाता है। इसमें प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की विशेष परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामायण में भी सूर्य उपासना का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता ने वनवास से अयोध्या लौटने के बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य देव की उपासना की थी। वहीं महाभारत में भी सूर्य उपासना से जुड़ी कथाएं प्रचलित हैं।
विद्यालय में आयोजित इस अनूठी झांकी ने यह संदेश दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों को संस्कारवान, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। इस तरह के आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।