संवाददाता : विशाल बाबू
इटावा : रविवार देर शाम आई ओलावृष्टि और तेज बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर गंभीर चोट पहुंचाई है। क्षेत्र के अनेक गांवों में अचानक बदले मौसम ने गेहूं, चना और सरसों की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। रबी सीजन की तैयार फसलें कटाई के मुहाने पर थीं, ऐसे में यह प्राकृतिक आपदा किसानों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है।
रविवार शाम बादल घिरने के बाद अचानक तेज हवाएँ चलने लगीं और कुछ ही मिनटों में ओलों की बरसात शुरू हो गई। खेतों में खड़ी गेहूं की बालियां ओलों की चोट से टूटकर झुक गईं। कई जगह दाने झड़ गए, जिससे उत्पादन में भारी कमी की आशंका है। चना की फसल, जो दाना बनने के अंतिम चरण में थी, ओलों से बुरी तरह पिट गई। दाने झड़ने लगे और कई पौधे टूट गए।
वहीं सरसों, जो इन दिनों कटाई के लिए तैयार खड़ी थी, तेज हवाओं और ओलों के कारण गिर गई। कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे पौधों के सड़ने की संभावना और बढ़ गई है।
किसानों की परेशानी बढ़ी
क्षेत्र के किसानों का कहना है कि इस बार मौसम लगातार अस्थिर रहा है। महंगे खाद, और कीटनाशकों के कारण लागत पहले ही बढ़ चुकी थी, ऐसे में यह नुकसान उन्हें आर्थिक संकट में धकेल सकता है। कई किसानों ने बताया कि उनकी फसल का 50 से 70 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हो चुका है।
प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया
इटावा प्रशासन ने मौके पर टीम भेजकर नुकसान का प्राथमिक सर्वे शुरू कर दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि प्रभावित किसानों को सरकार की ओर से मुआवजा दिलाया जाएगा और पूरी रिपोर्ट जल्द भेजी जाएगी।
निष्कर्ष
असमय बारिश और ओलावृष्टि ने इटावा के किसानों की कमर तोड़ दी है। कटाई से ठीक पहले आई इस आपदा ने न सिर्फ उत्पादन पर असर डाला है, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी और कमजोर कर दिया है। क्षेत्र के किसान अब सरकार से शीघ्र सहायता और राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
“और फिर किसान जाड़े की भयंकर रात की मेहनत से नहीं अंत में किस्मत से हार जाता है।”