Moradabad News: विश्व श्रवण दिवस मनाया गया 

Moradabad News: World Hearing Day Celebrated
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भूपेंद्र सिंह संवाददाता

मुरादाबाद स्वास्थ्य विभाग आज विश्व श्रवण दिवस मनायेगा। इसमें सभी सीएचसी, पीएचसी और जिला अस्पताल में लोगों को कर्ण रोग के बारे में बताया जाएगा। मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ. एमसी गर्ग ने कहा कि लोगों को कानों से संबंधित बीमारियों के बारे में अधिक जानकारी नहीं होती। ऐसे में आज स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस दिवस को मनाया जायेगा।  मुख्यचिकित्सा अधिकारी डॉ. गर्ग ने बताया कि दुनिया भर में ऐसे बहुत लोग हैं जो बहरेपन के शिकार हैं। बहरेपन में या तो कम सुनाई देता है या बिल्कुल भी सुनाई नहीं देता है आमतौर पर इसके शुरुआती लक्षणों को लोग नजरअंदाज कर देते हैं जिस वजह से धीरे-धीरे बहरेपन की समस्या गंभीर रूप ले लेती है।
प्रत्येक वर्ष, डब्ल्यूएचओ विश्व श्रवण दिवस की थीम तय करता है और साक्ष्य-आधारित एडवोकेसी सामग्री जैसे ब्रोशर, फ्लायर्स, पोस्टर, बैनर, इन्फोग्राफिक्स और प्रस्तुतियाँ तैयार करता है। इन एडवोकेसी सामग्रियों को दुनिया भर के सरकारी और नागरिक समाज के साथ-साथ डब्ल्यूएचओ क्षेत्रीय और देश के कार्यालयों में भी साझा किया जाता है।

विश्व श्रवण दिवस 2021 की थीम है

हिअरिंग केयर फॉर ऑल – जाँच. पुनर्वास. संवाद अपर मुख्याचिकित्सा अधिकारी और कार्यक्रम के नोडल डॉ. जीएस मर्तोलिया ने बताया हमारे कान की सुनने की क्षमता 80 डेसिबल होती है उसपर भी अगर देखा जाये तो बच्चों के कान और भी नाजुक होते हैं ।आज के मॉडर्न लाइफस्टाइल में लोग अपनी सुनने की क्षमता को ही खो बैठते हैं क्योंकि कुछ लोग ज्यादा शोर वाले स्थानों पर काम करते हैं जिसके चलते उनकी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। विश्व श्रवण सुनने की शक्ति दिवस हर साल 3 मार्च को मनाया जाता है। दिन बहरापन और सुनवाई हानि को रोकने और दुनिया भर में कान और सुनवाई देखभाल को बढ़ावा देने के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।
युवाओं में सुनाई न देने वाले प्रमुख कारणों में पर्दे में छेद या मेस्टोइड हड्डी का गलना है। कान की सबसे छोटी हड्डी स्टेपिज का कंपन रुकना, कान में तरल पदार्थ भरना, वैक्स, सिर या कान पर चोट लगना है। तेज आवाज में म्यूजिक सुनने से युवाओं में इस तरह की आशंका बढ़ जाती है। गालसुआ (मंप्स) और खसरा (मीजल्स) आदि के संक्रमण के बाद भी कुछ लोगों में कम सुनने की समस्या होती है। कई बार दवाइयों के रिएक्शन से भी ऐसा हो जाता है।

बच्चों में परेशानी

शिशुओं में यह समस्या जन्मजात, समय पूर्व जन्म (प्रीमेच्योर बर्थ) जेनेटिक कारणों या वंशानुगत बीमारियों से भी होती है। जन्म के बाद कान के पर्दे के पीछे द्रव या पस जमना (ग्लू इयर), पर्दे में संक्रमण और ज्यादा वैक्स जमना भी है।

बुजुर्गों की दिक्कत

अधिक उम्र के कारण भी सुनाई देने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। यह कान के अंदर की हड्डियों और नसों में कमजोरी के कारण होता है। कई बार ब्रेन से जुड़े एकोस्टिक ट्रयूमर, डायबिटीज, सिफ लिस की वजह से भी कम सुनाई देने लगता है।

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