First female teacher Savitribai Phule's birth anniversary and caste-token mass feast organized
Breaking News

प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती व जाति-तोड़क सामूहिक भोज आयोजित 

संवाददाता पंकज कुमार : अम्बेडकर नगर जिले के बिधानसभा आलापुर क्षेत्र के निकट विकासखंड जहांगीरगंज अंतर्गत प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर नौजवान भारत सभा द्वारा नथमलपुर हेठरिया गाँव में सभा कर जाति-तोड़क सामूहिक भोज आयोजित किया गया।

First female teacher Savitribai Phule's birth anniversary and caste-token mass feast organized

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव उपस्थित रहे कार्यक्रम की शुरुआत क्रान्तिकारी गीत ‘अभी लड़ाई जारी है’ से की गई।संचालन कर रहे आयोजक मित्रसेन ने बताया कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को सतारा ज़िले के नायगांव में हुआ था पहले ब्राह्मणवादी ताकतों से वैर मोल लेकर पुणे के भिडे वाडा में सावित्री बाई और ज्योतिराव फुले ने लड़कियों के लिए स्कूल खोला था।मुख्य अतिथि ने कहा मनुस्मृति के अघोषित शिक्षाबन्दी कानून के विरूद्ध यह जोरदार विद्रोह था। इस संघर्ष के दौरान उन पर पत्थर, गोबर, मिट्टी तक फेंके गये पर सावित्रीबाई ने शिक्षा का महत्वपूर्ण कार्य बिना रूके किया।

First female teacher Savitribai Phule's birth anniversary and caste-token mass feast organized

नौजवान भारत सभा के बिन्द्रेश ने कहा कि आज शिक्षा का पहले के मुकाबले ज्यादा प्रसार हुआ है। पर फिर भी व्यापक गरीब आबादी आज भी वंचित है और दलित उसमें भी अतिवंचित हैं। स्वतंत्रता के बाद 1991 की निजीकरण, उदारीकरण की नीतियों के बाद तो उसे पूरी तरह बाजार में लाकर छोड़ दिया है।

सरकारी स्कूलों की दुव्र्यवस्था व निजी स्कूलों व विश्वविद्यालयों के मनमाने नियमों व अत्यधिक आर्थिक शोषण के कारण पहले ही दूर रही शिक्षा सामान्य गरीबों की क्षमता से बाहर चली गयी है। स्वतंत्रता के 73 साल बाद भी साक्षरता सिर्फ 64 प्रतिशत पहुँची है उच्च शिक्षा के दरवाजे सिर्फ अमीरों के लिए खुले हैं। मोदी सरकार की नयी शिक्षा नीति ने शिक्षा के रहे-सहे जनवादी चरित्र का भी गला-घोंट दिया है। अनिवार्य शिक्षा, छात्रवृत्तियां व आरक्षणआज एक बार फिर से गरीबों व विशेषकर दलितों व अन्य वंचित तबकों से आने वालों पर नयी शिक्षाबन्दी लागू हो गयी है नयी शिक्षाबन्दी को तोड़ने के लिए सभी गरीबों-मेहनतकशों की एकजुटता का आह्वान कर सबके लिए निःशुल्क शिक्षा का संघर्ष हमें आगे बढ़ाना होगा।सभा को कमलेश मौर्य राहुल, योगेंद्र निराला आदिलोगों ने सम्बोधित किया ।सामूहिक भोज में रामधनी, रेहान, श्यामबोध प्रशांत पांडेय हरिप्रसाद यादव इमरान खान ,आशिक अली, हवलदार, प्रेमचन्द, चन्दन, अंतिमा, अंजू,पुरुषोत्तम, रमेश रंजन, किशन आकाश अजीत सहित सैकड़ों लोग शामिल रहें।