Etawah News: अखिल भारतीय कवि सम्मेलन: गीतों गजलों से डॉ विष्णु और शबीना अदीब ने कोरोना  कसक मिटाई

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संवाददाता आशीष कुमार

जसवंतनगर(इटावा)। यहां की ऐतिहासिक  रामलीला तो इस वर्ष कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गयी, परन्तु अखिल कवि सम्मेलन की परंपरा को रामलीला समिति ने जीवित रखते हुए बीती रात जब काव्य मंच सजाया तो कवियों ने गंगा जमुनी संस्कृति की प्रखरता को जीवंत बनाने का भरसक प्रयास किया।  नौसिखिया और  नाम चीन काव्य हस्ताक्षरों में केवल  डॉ विष्णु सक्सेना और शबीना अदीब ही रंग जमा पाने और श्रोताओं के दिलों में बैठने में कामयाब रहे।

ओज के  जाने माने हस्ताक्षर अब्दुल गफ्फार जो पिछले वर्ष वाह वाही लूट ले गए थे, इस बार उनकी वाणी में वो तेबर नही थे , जिनकी उम्मीद की जा रही थी।

इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन  का शुभारंभ नैनीताल उत्तराखंड से पधारी कवियत्री गौरी मिश्रा ने  सरस्वती वंदना की इन पंक्तियों से किया “शब्द को संवार दे,  अर्थ को निखार दे , पंक्तियों को प्यार दे”।  बाद में अपनी कविता पढ़ने की बारी  में जब वह आयीं तो मंच का 40 मिनट अपने लटकों झटकों में जाया करती रहीं और शेरो शायरी का कोई खास नमूना पेश नही कर  सकीं।

जयपुर राजस्थान से पधारे ओज के प्रतिष्ठित हस्ताक्षर अब्दुल गफ्फार ने  देश विरोधी बयान के लिए महबूबा मुफ्ती को ललकारा “बेशक तेरे पंख लगे हैं, मगर व्यर्थ मत बोला कर। मुफ्ती सईद की छोरी , जरा तोल के बोला कर।”

एवं भारतीय सैनिकों के राष्ट्र ध्वज के सम्मान की बात करते हुए यह पंक्तियां पढ़ीं  “इस  ध्वजा की रक्षा की खातिर बहनों की  राखी  छूटी, इस ध्वजा की रक्षा की खातिर हाथों से चूड़ी टूटी ।”

कवि सम्मेलनों के मंचों का संचालन में सिद्ध हस्त कानपुर के हास्य-व्यंग्यकार और टी वी सीरियल ‘नेता जी लपेटे  से ख्याति पाने वाले कवि हेमन्त पांडेय संचालन करते और चुटकियां लेते लोगों को गुदगुदाते रहे और अपनी शादी की वायरल रचना घोड़ी भाग गई सुनाकर  अपने आगमन की सार्थकता सिद्ध करने में कामयाब रहे।

गीतों के राजकुमार और यशभारती से  सम्मानित डॉ विष्णु सक्सेना ने  अपनी चिर परिचित शैली में गीतों को जब गुनगुनाया तो उपस्थित श्रोता मन्त्र मुग्ध हो गए। उन्होंने मुक्तकों की बानगी पेश  करते-‘ए मेरे रब  मैं सांस सांस में महक जाऊं, मेरी आवाज की खुशबू को हवाएं दे दो’।’ हमको जितना दिखा, उतना लिखा, अब पन्ना यही मोड़ दो, चांदनी रात में ….तुम हमारी कसम तोड़ दो हम तुम्हारी कसम तोड़ दें’।

विष्णु सक्सेना के  मधुर गीतों का श्रोताओं ने तालियों के साथ रसास्वादन किया।  उन्होंने श्रोताओं की मांग पर  ‘थाल पूजा का लेकर चले आईये,मंदिरों की बनावट से घर है मेरा’  –भी डूबकर सुनाया

पीलीभीत से पधारी नवोदित कवियत्री सुल्तान जहां ने कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में निम्न पंक्तियां- ‘उन की माटी चंदन है जान हथेली पर है जिनकी ,उनको सौ सौ  वंदन है,  डॉक्टर हो या नर्स पुलिस उन सब को रोना वीरों का शत शत अभिनंदन है’ ।उन्होंने पाक   परस्तों पर प्रहार करते हुए कहा  “हम हैं हिंद निवासी हमारी अलग कहानी है जिसे तिरंगा ध्वज प्यारा है वह ही हिंदुस्तानी है “|                      शेरो शायरी और गजलों  की मलिका शबीना अदीब ने कवि सम्मेलन की समाप्ति की कसक अपने कंधों पर उठाते जब पेश किया-बहार का आज पहला दिन है, अभी न नींद आएगी तुमको, अभी न हमको शुकून मिलेगा, अभी तो चाहत नई नई है’, तो श्रोता गदगद हो गए।शबीना ने 30 मिनट में रंग जमा दिया । फरमाइशें भी खूब पूरी कीं।

शाम साढ़े छह बजे से श्रीकृष्ण उत्सव महल में शुरू हुआ या कवि सम्मेलन रात 10 बजे समाप्त हुआ। अंत मे प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू ने  मौजूद प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव और समस्त कवियों का आभार व्यक्त किया। व्यवस्थापकों में अजेंद्र गौर, राजीव माथुर, हीरालाल गुप्ता,रतन शर्मा आदि का योगदान रहा।

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