संपादकीय
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आरबीआई द्वारा एटीएम में नक़दी नहीं तो बैंकों पर जुर्माने का फैसला काबिले तारीफ

सुनील पाण्डेय(कार्यकारी संपादक)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की दिशा आरबीआई द्वारा बैंकों पर नकदी ना होने की दशा में 10,000 ₹ जुर्माना लगाना एक सराहनीय पहल है।जिसका भारतीय जनमानस खासकर उन लोगों को हृदय से स्वागत करना चाहिए जो एटीएम निकासी ओर बैंक पर निर्भर थे।इसका प्रत्यक्ष फायदा उन सामान्य ग्राहकों पर पड़ेगा जो एटीएम का ज्यादातर इस्तेमाल करते हैं। प्रायः बैंक खातों में पर्याप्त रक़म होने के बावजूद भी ऐसे ग्राहकों को अवकाश अथवा किसी अन्य दिवस पर जब पैसे की महती आवश्यकता होती थी तो ज्यादातर एटीएमों में नकदी नदारद रहती थी।

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पैसे की आवश्यकता को लेकर बैंक ग्राहक एक एटीएम से दूसरे एटीएम का चक्कर लगाता रहता और अंत में थक हारकर बैंक खुलने का इंतजार करता था।जिन ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग या नेट बैंकिंग आती है उन्हें तो कोई विशेष फर्क नही पड़ेगा ,लेकिन ऐसे ग्राहकों जो एटीएम या बैंकों के निकासी पर निर्भर थे उन्हें आरबीआई के इस फैसले से भविष्य में काफ़ी शहूलियत मिलेगी।

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आरबीआई ने हाल ही में ग्राहकों की समस्या को देखते हुए एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि यदि एटीएम में नकदी की वजह से ग्राहकों को खाली हाथ लौटना पड़ा तो तो संबंधित बैंक -अर्थात जिस बैंक के एटीएम में नकदी नहीं होगी इसी 1 अक्टूबर 2021 से जुर्माना लगाया जायेगा। आरबीआई ने अपने इस फैसले की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा है कि किसी भी बैंक में एक माह में अधिकतम 10 घण्टे तक नक़दी की कमी स्वीकार्य है।इसके पश्चात यदि उससे अधिक समय तक एटीएम में नकदी की कमी पाई गईं तो सम्बन्धित बैंक को प्रति एटीएम 10,000 ₹ जुर्माना अदा करना होगा। हम सब जानते हैं कि आरबीआई पर बैंक नोट जारी करने की जिम्मेदारी है। वहीं दूसरी तरफ बैंकों पर संपूर्ण भारत मे अपने एटीएम नेटवर्क के माध्यम से नोट ग्राहकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

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इस व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने केे लिए बैंकों और व्हाइट लेबल एटीएम अर्थात वैसी कम्पनियां जिन्हें आरबीआई ने केवल एटीएम परिचालन का जिम्मा सौंपा है, उन ऑपरेटरों को अपना तन्त्र मजबूत रखना होगा।उन्हें इस बात का सदैव ध्यान रखना होगा कि उनके तहत आने वाले किसी भी एटीएम में नकदी की कभी भी कमी न हो ।
आरबीआई अपने निर्णय के प्रति कितना गंभीर है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने बेहद सख्त लहजे में कहा है कि एटीएम में नक़दी की कमी को बेहद गंभीरता से लिया जायेगा और किसी बैंक को बक्सा नहीं जाएगा और उनपर कठोरता पुर्वक मौद्रिक जुर्माना लगेगा। यदि किसी व्हाइट लेबल एटीएम में नकदी की कमी पाई गई तो जुर्माने की रकम उस बैंक से वसूली जायेगी,जिससे उस एटीएम में रकम डालने का करार है।कुल मिलाकर आरबीआई के इस बेहद महत्वपूर्ण फैसले पर यही कहा जा सकता है कि आने वाले समय में ग्राहकों को फायदा अवश्य होगा ।इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है।

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