Bihar News एईएस/जेई पर हो रहा है प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण

Bihar News Trainers are being trained on AES/JE  
Share News

संवाददाता मोहन सिंह बेतिया

जिले के बेतिया जीएनएम स्कुल परिसर में सिविल सर्जन की अध्यक्षता में एईएस/जेई पर प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गईं है।मौके पर सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने कहा की एईएस/जेई पर 25 फ़रवरी से 27 फ़रवरी तक चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण कराया जाएगा,ताकी बढ़ती गर्मी में ज़ब भी एईएस या जेई जैसे मामले आए, तो समय पर तुरंत उसकी पहचान हो सकें, साथ ही प्रारम्भिक इलाज उपलब्ध कराया जा सकें। इसी को लेकर जिलास्तरीय प्रशिक्षण कराया जा रहा है।वहीं अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्र ने कहा की समान्यतः गर्मियों के मौसम में एईएस/जेई के लक्षण बच्चों में देखें जाते है, उन्होंने बताया कि चमकी से प्रभावित बच्चों के तुरंत इलाज व पहचान हेतु आज बीसीएम, बीएचएम, सीएचओ, भीबीडीएस का प्रशिक्षण कराया गया है, ताकि प्रशिक्षित होकर वे लोग अपने अनुमंडल, पीएचसी में एएनएम, जीएनएम आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देंगे। वहीं 27 फरवरी 25 चिकित्सा पदाधिकारीयों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि जिले में चमकी बुखार से प्रभावित बच्चों का सही समय पर उपचार हो सकें। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने एईएस से लड़ने की तैयारी शुरु कर दी है। इस क्रम में जिले के जीएमसीएच में 30 बेड, अनुमण्डलीय अस्पताल में 10 बेड, पीएचसी में 02 बेड बनाए गए है। उन्होंने बताया की जिले को चमकी के प्रभाव से बचाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

IMG 20250225 WA0130

– चमकी प्रभावित बच्चों का करना है तुरंत उपचार:

डीभीडीसीओ डॉ नवल किशोर प्रसाद ने बताया कि चमकी से प्रभावित बच्चे मिलने पर तत्काल उनकी प्राथमिक चिकित्सा की जाएगी, वहीं एईएस पीड़ित बच्चों के हालत स्थिर होने के बाद या प्राथमिक उपचार के बाद ही एम्बुलेंस में बच्चों को उनके अभिभावक के साथ जीएमसीएच या एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर अस्पताल में रेफर किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान डॉ प्रदीप शरण ने एसओपी में शामिल उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं, डोज, जांच और एईएस पीड़ित के उचित प्रबंधन की बारीकीयाँ बतायी।

-चमकी के लक्षण, एवं इससे बचने के उपाय:

भीडीसीओ सुशांत कुमार एवं गणेश कुमार ने बताया की चमकी होने पर मांसपेशी में दर्द, पूरे शरीर में थकान, कंपन होना, तेज बुखार, सुस्त होना, या भूख न लगना, चेतना का बदला हुआ स्तर, भटकाव, उल्टी होना, शरीर में पानी की कमी होना। इससे बचने के लिए रात्रि में बच्चों को खाली पेट न सोने दें, धुप में न निकले, पानी का ज्यादा सेवन करें, ताजे फल खाए, ओआरएस घोल का सेवन करें, किसी प्रकार का लक्षण दिखे तो तुरंत आशा दीदी को बताए, और अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में इलाज कराए।Bihar News Trainers are being trained on AES/JE

 

मौके पर सीएस डॉ विजय कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रमेश चंद्र, डीभीडीसीओ डॉ नवल किशोर प्रसाद, भीडीसीओ सुशांत कुमार, गणेश कुमार व स्टीफन जी व अन्य स्वास्थ्य कर्मी शामिल हुए।

Trending News