Bihar news होती रहती है चंद्रावत नदी की समीक्षा पर नहीं रूकता है तो नदी का अतिक्रमण

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संवाददाता. मोहन सिंह बेतिया

राजा महाराजाओं की विरासत “बेतिया राज” की करूण व्यथा शायद ही कोई लेखक अपनी शब्दों की भावना के साथ लिख सकें क्योंकि “लिखते रहें पत्रकार और लूटती रही विरासत”।
ऐसा ही बेतिया राज के द्वारा उद्गमित बेतिया के लिए जीवन दायिनी बनने वाली नदी की विरासत दिन प्रतिदिन विलुप्त होने की कगार पर पहुंच पहुंच कर सिसक रही है।

IMG 20211201 WA0027 नदी को बंद करने से लेकर नदी को भरकर उसे नाली में तब्दील को अह्वाम बेचैन दिखाई पड़ती है क्योंकि इस महंगाई के जमाने में जमीन खरीदना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है पर नदी को भरकर विरासत मिटाकर आशियाना बनाना सबसे सरल प्रतीत हो रहा है। हो भी क्यों ना क्योंकि अब तो ना राजा है ना महाराजा तो फिर क्यों बचाई जाए चंद्रावत नदी और क्या लाभ है इन नदियों से जिसमें ना नाव है और ना ही जल। ना ही इस्तेमाल है और ना ही इसकी धार्मिक ऐतिहासिक महत्व। आधुनिक जीवन शैली व आधुनिकता में ऐसे नदियों का ना ही कोई महत्व है और ना ही कोई उपयोगिता। महत्व है तो बस बेशकीमती जमीनों को अतिक्रमित कर घर बनाकर रहने का।

 

 

IMG 20211201 WA0027हालांकि जिले के विभिन्न प्रखंडों में पड़ने वाली चंद्रावत अतिक्रमण के कारण विलुप्तप्राय होने की स्थिति बनाए हुए है। पर बेतिया प्रखंड क्षेत्र में चंद्रावत नदी में तत्काल अतिक्रमण करने के लिए मिट्टी भराई और ईंट द्वारा पक्का निर्माण कराने की सामान गिराई जा रही है। यह निर्माण का सामान निर्माणाधीन गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के सटे मेडिकल वाहन गैराज के पश्चिम दिशा में स्थित नदी किनारे किया जा रहा है। चंद्रावत नदी की जीर्णोद्धार के लिए मुख्यतः पांच सालों से लगातार चर्चाएं व निर्देश जारी हैं। जिसको लेकर कई बार जिला व प्रदेश स्तर पर समीक्षा बैठक भी हुई और आदेश भी दिया गया। नदी की पैमाइस करने के लिए अंचलाधिकारी बैरिया, नौतन व बेतिया के साथ वर्तमान नगर निगम के आयुक्त तक को जिम्मेदारी दी जा चुकी है। पर संभवतः यह सारी निर्देश व समीक्षा कागजों से लेकर मीडिया तक सिमट कर ही दिखाई पड़ती रही है।

 

 

Bihar news होती रहती है चंद्रावत नदी की समीक्षा पर नहीं रूकता है तो नदी का अतिक्रमणहालांकि चंद्रावत नदी के प्रेमियों ने कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ निलेश रामचंद्र देवड़े के समय जहाँ अभी अतिक्रमण किया जा रहा है वहाँ से अतिक्रमण हटाया गया था और उनकी तत्परता और पहल से चंद्रावत नदी के अतिक्रमण मुक्त और अविरल होने की उम्मीद बहुत ही बढ़ गई थी परन्तु उनके स्थानांतरण के पश्चात यह चंद्रावत नदी का मामला ठंडा हो गया। हालांकि वर्तमान जिलाधिकारी कुंदन कुमार के समय भी कई बार निर्देश व समीक्षा रिपोर्ट तैयार की गई परन्तु उन्होंने चंद्रावत नदी के जीर्णोद्धार को कभी भी धरातल पर उतारने का काम नहीं किया। उनकी उदासीनता ही है कि वो समीक्षा करते हैं और अतिक्रमणकारी अतिक्रमण करते जाते हैं। वर्तमान जिलाधिकारी यदि सकारात्मक पहल के साथ प्राथमिकता दें तो चंद्रावत नदी को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है।

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