जनवाद ब्यूरो
आगरा। आगरा छावनी के ठेके के सफाई कर्मचारियों से नौकरी करने के बाद भी रिश्वत मांगने का मामला जोर-शोर से सोशल मीडिया पर चल रहा है ।आगरा छावनी के अंतर्गत विगत दिनों कीर्तन की मांग को लेकर के ठेके के कर्मचारियों के द्वारा काम बंद हड़ताल की गई थी जिसमें कर्मचारी और ठेकेदार के बीच में टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के द्वारा छावनी परिषद के अधिकारियों से वार्ता करने के बाद में इस पूरे मामले में समझौता कराया गया था और किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाने और हटाए गए कर्मचारियों को नौकरी पर लगाने का भरोसा कर्मचारियों को दिया गया था ।
उस समय कर्मचारियों के द्वारा आगरा छावनी के कर्मचारी मनीष नैयर पर नौकरी के नाम पर पैसे लेने और नहीं देने पर नौकरी से हटाने के आरोप लगाए गए थे, एक बार फिर यह मामला यह कहते हुए तूल पकड़ा जा रहा है के समझौता कराने वाले वाल्मीकि समाज के एक नेता के द्वारा कर्मचारियों से ₹3000 प्रति महीना रिश्वत के मांगे जा रहे हैं और नहीं देने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है कर्मचारियों का आरोप है कि उपरोक्त नेता के द्वारा दी जाने वाली धमकी का ऑडियो उनके पास मौजूद है ।पीड़ित कर्मचारियों का कहना यह है कि छावनी परिषद के ऊपर कर्मचारी से सांठगांठ कर ठेकेदार और उपरोक्त नेता कर्मचारियों से लगातार ₹3000 महीने दारी बांधने का दबाव डाल रहे हैं नहीं देने पर लोगों को नौकरी से हटाने की धमकी दे रहे हैं उपरोक्त नेता और छावनी परिषद के कर्मचारी के द्वारा साठगांठ करके एक दर्जन कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के नोटिस भी पिछले दिनों दिए गए थे मगर कर्मचारियों द्वारा पैसे देने की हामी भरने और लिखित में माफी मांगने पर उन्हें उन्हें नौकरी पर रख लिया गया है।
इस पूरे मामले का जिक्र कर्मचारियों द्वारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद भी अधिशासी अधिकारी छावनी परिषद के द्वारा अपने कर्मचारी पर अंकुश लगाने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने सहित कई मामलों पर कोई गंभीरता पूर्वक विचार नहीं किया जा रहा है जिससे कर्मचारियों के साथ होने वाले उत्पीड़न लगातार बढ़ते जा रहे हैं दबी जुबान में कर्मचारियों का कहना यह है की छावनी परिषद का कर्मचारी मनीष नैयर और ठेकेदार एक वाल्मीकि समाज के नेता से मिलकर कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं नव तो उन्हें पूरा वेतन मिल रहा है ना ही राज्य की और राष्ट्रीय अवकाश दिया जा रहा है कर्मचारियों को मिलने वाले भविष्य निधि को भी समय पर जमा नहीं किया जा रहा है यदि कर्मचारियों के द्वारा अपनी इन समस्याओं के बारे में ठेकेदार के गुर्गे और कर्मचारियों से जानकारी की जाती है तो उन्हीं कर्मचारियों को छावनी परिषद का यह कर्मचारी ठेकेदार से कह कर के काम से निकाल देता है इस भयंकर कोरोना काल में आगरा छावनी के सफाई कर्मचारियों के इस उत्पीड़न से जाग कर्मचारी भाई भी थे वही छावनी परिषद के खिलाफ कर्मचारियों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।