राष्ट्र के निर्माण में धर्म की भूमिका : डॉक्टर अंबेडकर जयंती विशेषांक

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संपादकीय-संजय कुमार असि. प्रो.( शिक्षा शास्त्र) शिवपाल सिंह यादव महाविद्यालय कैस्त जसवंतनगर इटावा

दुनिया के हर धर्म में कमियां हो सकती है लेकिन दुनिया के हर धर्म में दूसरे धर्म के लोगों के लिए हर दरबाजे खुले हैं सिवाय हिन्दू धर्म के, इसमें हिंदुओं के लिए ही दरबाजे सदियों से बन्द रखे गए हैं बस इसमें केवल दूसरों पर दोष देना, समस्या की व्याख्या करना, कुरीतियों को परिभाषित करना तथा रूढ़ियों को भी सभ्यता, संस्कृति का दर्जा देना इस धर्म के संरक्षकों की सदियों पुरानी नियति रही है लेकिन किसी भी बुराई को स्वीकार या उसका विरोध अथवा उसमें सुधार की कभी पहल कभी नहीं की गई।

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मुझे उन लोगों की समझ पर सबसे अधिक तरस आता है जो बात बात पर एकता, समानता की बातें करते हैं और उसके लिए धर्म, धर्मगुरु, नेता या व्यक्ति के गुणगान करने लग जाते हैं। याद रखें हिन्दू धर्म ने वर्ण को जन्म देकर स्वयं बंटवारे का ऐलान करता है जिसके एवज में एकता की बातें करना एक छल, धोखा और षड्यंत्र से अधिक कुछ नहीं है। जो भी व्यक्ति किसी चीज़ को एकता से जोड़ता है यकीनन वह एकता पर बल नहीं बल्कि किसी इवेंट को सफल बनाने का प्रयत्न भर होता है।

कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो राजा राम मोहन राय के बाद हिन्दू धर्म में कोई बड़ा समाज सुधारक पैदा नहीं हुआ है जिसने कुरीति के खात्मे हेतु अपने धर्म से दुश्मनी मोल ली है। इस धर्म का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही है कि इसमें कभी समाज सुधारक नहीं मिले। यदि कोई समानता की बातें करते भी है वह अपने तमाम जातिय वर्चस्व, जातिय अधिकार तथा जातिय ब्रांडिंग पर्सनालिटी को संरक्षित करने के बाद चुनिंदा विषयों पर अपनी बात करते हैं। समस्या इसीलिए खड़ी है क्योंकि समाधान जिनके हाथों में हैं वे कुरीति के पतनकर्ता से अधिक संरक्षक बन जाते हैं।

सोचिये मृत्यु सिर पर खड़ी है और लोग अब जातिय धारणाओं को पकड़कर बैठे हैं आप इन्हें गलत मत समझीये बल्कि इनके पीछे की धारणाओँ पर जाइये। बाबा साहेब अंबेडकर कहते हैं कि जब तक असमान तथा अव्यवहारिक धार्मिक स्रोतों को खत्म नहीं किया जाता है तबतक समानता एक कल्पना मात्र है। वे जातियों को राष्ट्र विरोधी मानते थे। हमें समझना होगा कि इस देश की जातियाँ ही भारत की सबसे बड़ी समस्या है आप इसे स्वसन्तुष्टि हेतु कोई भी व्याख्या कर सकते हैं मगर सच जिसदिन स्वीकार करके उसे बदलने और खत्म करने हेतु जड़ पर काम होगा भारत की तस्वीर बदल जाएगी। जय भीम जय संविधान जय भारत

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