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लेखिका: श्रीमती सोनिया

राजकीय कन्या इंटर कॉलेज खलीलाबाद संतकबीरनगर उत्तर प्रदेश की व्यायाम शिक्षिका सोनिया ने कहा कि जब भी फादर डे आता है। मेरी आंखे आंसू से भर आती है।की पिता की कमी कितनी खलती है। ये हमने खुद ही महसूस करती हूं।जब मै छोटी थी तब मेरे पिता जी हमको बाजार ले जाते तो दुकान दार से बोलते कि आप के दुकान में जो सबसे अच्छा कपड़े हो वही निकालो की मेरी बेटी परी जैसे लगे। पहले हम चार बहनें थे भाई नहीं था लेकिन मेरे पिता जी कभी हम लोगो को बेटी नहीं बेटे की तरह पालन पोषड किए और पढ़ाया लिखाया । कभी पिता जी ने हम लोगों को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी ।आज हमारी चारो बहने पोस्ट – ग्रेजुएट होकर दो बहने आज सर्विस में है और कि पढ़ाई जारी है ।काफी दिनों बाद भगवान ने हम चार बहनों को राखी बांधने के लिए एक भाई दिया। भाई भी इंटर कर ट्रेनिग कर रहा है कुछ दिनों तक पिता का साया हम सभी पर बना रहा। लेकिन कुछ दिनों बाद हम सब भाई बहनों के सर से पिता का साया हट गया।आज हम सब भाई बहने अपने पिता की जो कमी महसूस कर रही हूं। जब की मेरी माता जी अभी जीवित है ।सभी भाई बहनों की पढ़ाई लिखाई शादी विवाह हमारे ही जिम्मे हैं। कोविड-19 काल के संक्रमण के समय जिन बच्चों ने अपने पिता को खोया है।आज उस बच्चे से पूछिए कि पिता की कमी क्या होती हैं। मुझ से बेहतर कोई नहीं जानता होगा ।की पिता के रहने पर बाजार के सारे खिलोने अपने होते है।इस लिए कोविड-19 काल में जिन बच्चों ने अपना माता पिता खोया है उन बच्चो को हम एक पिता तो नहीं दे सकते है ।लेकिनअपने स्तर से उन बच्चो की पढ़ाई लिखाई में एक छोटी सी मदद जरूर करना चाहती हूं।ये मेरी दिली खवाहिश है।

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