Etawah News: निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल,शुरू हुआ कामकाज, निजीकरण 15 जनवरी तक टला

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संवाददाता मनोज कुमार राजौरिया

इटावा: निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग की हड़ताल खत्म हो जाने के बाद अब अधिकारियों के सामने तेजी से काम करने, वसूली बढ़ाने और लाइनलॉस कम करने की चुनौती है। इसे लेकर पहले दिन से ही काम में तेजी दिखाई दी। उपभोक्ता भी अपना बिल जमा करने के लिए बिजली विभाग के कार्यालयो में बुधवार की सुबह से ही पहुंचने लगे। कैश काउंटर खुलते ही बिल जमा होने की शुरुआत हो गई। विभाग की ओर लॉकडाउन से पहले तार आदि बदले जाने के कारण फाल्ट की संख्या में तो कमी आई है।

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शहरी क्षेत्र में तो औसतन 10 से 12 फाल्ट रोजाना होते हैं जिनकी मरम्मत की जाती है। हड़ताल के दौर में बड़ी बात यह देखने को मिली कि दो तीन स्थानों पर ही फाल्ट हुए जिनकी ठेका कर्मियों ने मरम्मत भी कर दी जिससे बिजली सप्लाई में कोई परेशानी नहीं हुई । आमतौर पर यदि बड़ी खराबी नहीं है तो फाल्ट ठीक होने से आधा घंटा का समय लगता है। ठेका कर्मचारियों के हड़ताल पर नहीं जाने के कारण बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बाद भी जिले में बिजली को लेकर कोई संकट उत्पन्न नहीं हुआ रोजमर्रा की तरह सप्लाई मिलती रही और फाल्ट हुए तो मरम्मत भी कर दी गई। शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में यही स्थिति बनी रही।

शासन की ओर से अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरेशन केअध्यक्ष अरविंद कुमार, राज्य विद्युत उत्पादन निगम के प्रबंध निदेशक सैंथिल पांडियन व निदेशक (कार्मिक एवं प्रशासन) ए.के. पुरवार ने समझौते पर दस्तखत किए। समझौते में कहा गया है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का निजीकरण का प्रस्ताव राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। इसके अलावा पूर्वांचल निगम के संबंध में  किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। बीती देर रात तक वार्ता में भी लगभग इन्हीं मुद्दों पर सहमति बन गई लेकिन अरविंद कुमार के समझौते पर दस्तखत करने से इन्कार कर देने की वजह से टकराव बढ़ गया था। सोमवार रात में मे वार्ता विफल हो जाने के बाद कार्य बहिष्कार का व्यापक असर नजर आने लगा था।

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