संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण।
बिहार सरकार की पूर्ण शराबबंदी नीति को जन-आंदोलन का स्वरूप देने और “नशामुक्त बिहार” के संकल्प को साकार करने में जीविका दीदियाँ लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन के निर्देशानुसार पश्चिम चंपारण में 17 जून से 26 जून तक “नशा मुक्त सप्ताह” का व्यापक आयोजन किया गया।

इस दौरान जिले के सभी 18 प्रखंडों में जीविका के सामुदायिक संगठकों एवं स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हजारों दीदियों ने गांव-गांव जाकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। अभियान के तहत प्रभात फेरी, जागरूकता रैली, नुक्कड़ नाटक, शपथ ग्रहण, समूह बैठक, ग्राम संवाद और जनसंपर्क कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक आर.के. निखिल ने बताया कि इन गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं, युवाओं एवं ग्रामीण परिवारों को मादक पदार्थों के सेवन से होने वाले सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। साथ ही नशामुक्त समाज के निर्माण में सामुदायिक भागीदारी का संदेश भी दिया गया।
अभियान के दौरान जीविका दीदियों ने लोगों को यह संकल्प दिलाया कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहेंगे, अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे तथा अवैध मादक पदार्थों के सेवन और तस्करी के खिलाफ प्रशासन का सहयोग करेंगे।
उल्लेखनीय है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से जीविका दीदियाँ राज्य सरकार के नशामुक्ति अभियान की अग्रिम पंक्ति की सहयोगी रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के मजबूत नेटवर्क के माध्यम से वे ग्रामीण क्षेत्रों में नशे के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाने, महिलाओं को सशक्त बनाने, पारिवारिक सौहार्द बढ़ाने और सामाजिक परिवर्तन को गति देने का कार्य लगातार कर रही हैं।
जिला प्रशासन का मानना है कि नशामुक्त समाज के निर्माण में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है और जीविका दीदियों की सक्रिय सहभागिता इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने में अत्यंत प्रभावी साबित हो रही है। प्रशासन और जीविका के संयुक्त प्रयासों से पश्चिम चंपारण में नशामुक्ति का यह जनआंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है तथा समाज में सकारात्मक बदलाव का आधार बन रहा है।