Bihar News : पंडित राजकुमार शुक्ल की ऐतिहासिक डायरी का दस्तावेजीकरण, ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान को मिली रफ्तार

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संवाददाता: मोहन सिंह

बेतिया/पश्चिमी चंपारण: राजकुमार शुक्ल की ऐतिहासिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण’ अभियान के तहत उनके पैतृक आवास सतवरिया में हस्तलिखित डायरी और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया।

यह डायरी चंपारण सत्याग्रह के अनछुए पहलुओं को उजागर करने के साथ-साथ महात्मा गांधी और पंडित शुक्ल के गहरे संबंधों की सजीव झलक प्रस्तुत करती है।

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जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी राकेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर डायरी का सूक्ष्म अवलोकन किया। इस दौरान पंडित शुक्ल के पौत्र भी उपस्थित रहे और उन्होंने इस पहल को ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में सराहनीय कदम बताया।

राकेश कुमार ने कहा कि यह डायरी इतिहास के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके संरक्षण से शोधकर्ताओं एवं इतिहास प्रेमियों को चंपारण आंदोलन की जमीनी सच्चाइयों को समझने में नई दिशा मिलेगी। इस अवसर पर स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों एवं विभागीय कर्मियों ने भी पंडित शुक्ल के योगदान को नमन किया।

इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम्’ योजना के तहत जिले में प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटाइजेशन का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन की अध्यक्षता में आयोजित जिला समिति की बैठक में इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।

बैठक में बताया गया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के पास सुरक्षित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक महत्व की पांडुलिपियों को खोजकर उनका डिजिटाइजेशन करना है, ताकि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को संरक्षित किया जा सके।

प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके पास पूर्वजों द्वारा लिखित कोई भी महत्वपूर्ण दस्तावेज या पांडुलिपि हो, तो उसे ‘ज्ञान भारतम्’ पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से साझा करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पांडुलिपियों को किसी से लिया नहीं जाएगा, बल्कि केवल उनका डिजिटाइजेशन कर सुरक्षित रखा जाएगा।

साथ ही, ऐसी ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित रखने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने की भी योजना है। बैठक में डॉ. दिवाकर राय, नसीम अहमद, प्रशांत कुमार, प्रभात कुमार, डॉ. विभाकर दुबे, अंशुमन कुमार एवं डॉ. राजेश चंदेल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस प्रकार ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के माध्यम से चंपारण की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास अब धरातल पर साकार होता नजर आ रहा है।

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