देश प्रयागराज

यह बीता कैसा वर्ष था

यह बीता कैसा वर्ष था

सुनील पांडे ‘सुकुमार’

यह बीता कैसा वर्ष था
न उत्साह था न हर्ष था
बस दो महीने कट चैन से
बाकी तो बस संघर्ष था
जीवन को लेकर डरा हुआ
गांव शहर का हर शख्स था
कोविड-19 नाम का यह कैसा दैत्य वंश था
इसने जीना मुहाल किया कुछ ऐसा इसका दंश था
अंग्रेजी की कुछ शब्द अब हिंदी में भी गढे़ गए
जो इससे पहले हिंदी में ना यूं ही कभी पढ़े गए
लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंस
अनलॉक- टू , अनलॉक- वन
सैनिटाइजर , सोप और मास्क शब्द
इस वर्ष पूरी तरह छाया रहा
कुल मिलाकर पूरे वर्ष ही
कोरोना का ही साया रहा
आने वाले नववर्ष वर्ष में इस महामारी का अंत हो
हर विपदा दूर हो जाए कुछ ऐसा नववर्ष हो