संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
हाजीपुर, वैशाली।
NEET (UG)-2026 परीक्षा से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में राज्य के विभिन्न जिलों में उत्पन्न परिस्थितियों के बीच वैशाली जिला प्रशासन ने जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के संयुक्त नेतृत्व, बहु-स्तरीय समन्वय, सतत निगरानी तथा जनसहभागिता के माध्यम से पूरे जिले में शांति, कानून-व्यवस्था एवं सामान्य जनजीवन को पूरी तरह सुरक्षित और सुचारू बनाए रखा।

प्रशासन द्वारा पूर्व से ही संयुक्त आदेश जारी कर सभी प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट दायित्व सौंप दिए गए थे, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकी।
प्रशासन की रणनीति केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि संवाद, विश्वास निर्माण, जन-जागरूकता और निरंतर निगरानी को भी समान प्राथमिकता दी गई। जिला पदाधिकारी ने लगातार समीक्षा बैठकें एवं रात्रिकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्थिति का आकलन किया, जबकि पुलिस अधीक्षक ने स्वयं रात्रि में विभिन्न संवेदनशील स्थलों का औचक निरीक्षण कर सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की।
नई गंडक चेक पोस्ट, रामाशीष चौक, महुआ मोड़ सहित विभिन्न चेक पोस्टों पर जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने रात्रिकालीन निरीक्षण कर प्रतिनियुक्त अधिकारियों एवं पुलिस बल की उपस्थिति, सघन वाहन जांच अभियान, सुरक्षा व्यवस्था तथा गश्ती गतिविधियों का जायजा लिया। इस दौरान अधिकारियों को संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों पर विशेष निगरानी रखने, नियमित वाहन जांच, प्रभावी गश्ती तथा किसी भी परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
हाजीपुर रेलवे स्टेशन, आरपीएफ पोस्ट तथा सीसीटीवी नियंत्रण कक्ष का भी औचक निरीक्षण किया गया। यहां यात्रियों की सुरक्षा, सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता एवं निगरानी व्यवस्था की समीक्षा की गई। आरपीएफ एवं स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया।
जिला नियंत्रण कक्ष को सक्रिय कमांड एवं मॉनिटरिंग सेंटर के रूप में विकसित किया गया, जहां से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया, समाचार प्रसारण तथा जिले के विभिन्न संवेदनशील स्थलों पर स्थापित सीसीटीवी कैमरों की चौबीसों घंटे निगरानी की गई। वायरल वीडियो, भ्रामक एवं भड़काऊ पोस्ट, अफवाह फैलाने वाले तत्वों तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली प्रत्येक गतिविधि का त्वरित सत्यापन कर संबंधित थानों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विधि-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से हाजीपुर शहरी क्षेत्र में पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के साथ रायट कंट्रोल मॉक ड्रिल (Riot Control Mock Drill) आयोजित की गई। संवेदनशील स्थलों पर वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभ्यास कराया गया, जिससे किसी भी संभावित आपात स्थिति से प्रभावी एवं पेशेवर ढंग से निपटने की तैयारियों को और सुदृढ़ किया जा सके। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में नियमित फ्लैग मार्च निकालकर आमजन में सुरक्षा एवं विश्वास का वातावरण स्थापित किया गया।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जनसंवाद को भी विशेष महत्व दिया। जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से छात्रों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की। छात्रों से लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने, अफवाहों से दूर रहने तथा असामाजिक तत्वों के बहकावे में न आने का आग्रह किया गया। यह अपील सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से व्यापक रूप से प्रसारित की गई।
जिले के सभी प्रखंडों एवं शहरी क्षेत्रों में माइकिंग कर शांति एवं संयम बनाए रखने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही व्यापक स्तर पर पंपलेट वितरित किए गए तथा विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों के संचालकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित कर सहयोग प्राप्त किया गया। यह सुनिश्चित किया गया कि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रामक सूचना जनभावनाओं को प्रभावित न कर सके।
प्रशासन एवं पुलिस के साथ-साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पंचायत प्रतिनिधियों, समाज के प्रबुद्ध नागरिकों, छात्र संगठनों, शिक्षकों, कोचिंग संस्थानों, अभिभावकों एवं मीडिया ने भी अत्यंत जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका निभाई। सत्यापित एवं जिम्मेदार सूचना के प्रसार तथा अफवाहों पर रोक लगाने में मीडिया का सहयोग महत्वपूर्ण रहा, जबकि स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने शांति एवं सामाजिक सौहार्द बनाए रखने में प्रशासन का सक्रिय साथ दिया।
जिला पदाधिकारी द्वारा विभिन्न विभागों के बीच निरंतर समन्वय, वरीय अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग, पुलिस अधीक्षक द्वारा सतत फील्ड निरीक्षण, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों की संयुक्त रणनीति, प्रभावी सूचना तंत्र, साइबर मॉनिटरिंग, फ्लैग मार्च, मॉक ड्रिल, वाहन जांच अभियान, रात्रिकालीन गश्त तथा जन-जागरूकता अभियान के परिणामस्वरूप पूरे वैशाली जिले में शांति एवं कानून-व्यवस्था पूरी तरह सामान्य रही। छात्र विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जिले में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई।
यह “वैशाली मॉडल” इस बात का उदाहरण है कि संवेदनशील परिस्थितियों में प्रशासन, पुलिस, जनप्रतिनिधियों, मीडिया, शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों एवं आम नागरिकों के बीच प्रभावी समन्वय, सतत संवाद, समयबद्ध रणनीति तथा साझा उत्तरदायित्व के माध्यम से कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक वातावरण और सामाजिक सौहार्द दोनों को सफलतापूर्वक सुरक्षित रखा जा सकता है।