Prayagraj News: साहित्यकार जया मोहन बनीं ‘गुफ्तगू’ की नई संरक्षक

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ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज

प्रयागराज। श्रीमती जयश्री श्रीवास्तव ‘जया मोहन’ ‘गुफ्तगू’ की नई संरक्षक बन गई हैं। 24 दिसंबर 1953 को महोबा, उत्तर प्रदेश में जन्मी जया मोहन वर्तमान समय में प्रयागराज के स्टेनली रोड, कमला नगर में रहती हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद में सहायक सचिव पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। साहित्य की विभिन्न विधाओं की इनकी 30 पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘कलरव’, ‘दाने अनार के’, ‘कंचे रंग बिरंगे’, ‘चुनिंदा बाल कहानियां’, ‘झुनझुना’, ‘उड़ी पतंग’, ‘नाचे मोर’, ‘रिमझिम’, ‘महकते फूल’, ‘टिमटिम तारे’, ‘उड़ान’, ‘किससे कहूं’, ‘बिखरे मोती’ आदि प्रमुख हैं। एक दर्जन से अधिक संस्थाओं ने इन्हें सम्मानित किया है।

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इनके अलावा शैलेंद्र कपिल, संजय सक्सेना, विजय प्रताप सिंह, मासूम रजा राशदी, पंकज के. सिंह, राकेश मिश्र ‘तूफान’, डाॅ. प्रभामाल द्विवेदी, अमर राग, नजर कानपुरी, डाॅ. बुद्धिनाथ मिश्र, मुनेश्वर मिश्र, हसनैन मुस्तफाबादी, जफर बख्त, डाॅ. पीयूष दीक्षित, आनंद सुमन सिंह, अरुण अर्णव खरे, रामचंद्र राजा, उमेश नारायण शर्मा, माहेश्वर तिवारी, सरिता श्रीवास्तव और देवेंद्र प्रताप वर्मा ‘विनीत’ साहित्यक संस्था एवम प्रकाशन ‘गुफ्तगू’ की संरक्षक हैं।

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‘गुफ्तगू’ के संरक्षकों को ‘गुफ्तगू पब्लिकेशन’ की सभी पुस्तकें और गुफ्तगू पत्रिका के सभी उपलब्ध पुराने अंक दिए जाते हैं। संरक्षकों का पूरा परिचय फोटो सहित हम एक अंक में छापते हैं और सभी अंक के संपादकीय बोर्ड टीम में उनका नाम छपता है, निधन के बाद भी हम संस्थापक संरक्षक में उनका नाम प्रकाशित करते हैं।

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