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प्रतापगढ़ न्यूज़ :कलयुग में राम नाम से ही लगेगी नैया पार पं. गौरंगी जी महाराज

रिपोर्ट आशुतोष तिवारी प्रतापगढ़

विकासखंड सदर क्षेत्र के अचलपुर विकास नगर में सात दिवसीय संगीतमय श्री राम कथा सुनाते हुए कथावाचक पंडित श्री गौरंगी जी महाराज (गौरी जी) अयोध्या धाम ने मनोहरी श्री राम सीता विवाह की तीसरे दिन बुधवार को कथा सुनाते हुए कहा कि ‘एहि सुंदर मिथिला धाम अब नाही कोनो धाम” दुल्हन माता सीता और दूल्हा बने श्री राम की मनोहारी कथा सुनाते हुए कहा की राजा जनक की पुत्री सीता जी थी और अयोध्या के राजा दशरथ के घर भगवान राम का जन्म हुआ था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीता जी का जन्म धरती से हुआ था। एक बार सीता जी ने शिवजी का धनुष उठा लिया। यह देखकर राजा जनक आश्चर्यचकित रह गए क्योंकि सीता जी का धनुष परशुराम जी के अतिरिक्त कोई और नहीं उठा सकता था। भगवान शिव ने परशुराम जी को अपना धनुष दिया था। जिसे परशुराम जी ने जनक जी को दे दिया था ।और सीता जी के विवाह का समय आया तो जनक जी ने सोचा कि सीता से उसका ही विवाह हो सकता है जो भगवान शिव के धनुष को उठा लेगा ।क्योंकि सीता जी ने इस धनुष को उठाया था ।जनक जी ने सीता जी के स्वयंवर की घोषणा कर दी ।और सीता जी से विवाह के लिए शिव धनुष उठा लेगा ।उसी के गले में सीता जी की वरमाला डालेंगी सीता जी के सोमवार की सूचनाओं महर्षि वशिष्ठ जी को भी हुई तो वह भगवान राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला की राजधानी जनकपुर पहुंच गए सीता जी के सोमवार में अनेकों राजकुमार आए हुए थे। महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम और लक्ष्मण जी के साथ महल में स्थान ग्रहण किया बारी-बारी से सभी राजकुमारों को शिव धनुष उठाने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हुए जनक जी बहुत निराश हो गए । कोई शिव धनुष उठा नहीं पा रहा है। तब उन्होंने भरी सभा में कहा कि क्या उनकी बेटी के लिए कोई योग्य राजकुमार नहीं है ।तब महर्षि वशिष्ठ ने राम जी को शिव धनुष उठाने की आज्ञा थी तब प्रभु राम ने अपने गुरु को प्रणाम किया और शिव धनुष को एक हाथ से उठाकर वह प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तभी वह धनुष टूट गया यह देखकर जनक जी खुश हो गए और सीता जी ने प्रभु राम के गले में वरमाला पहना दी।

प्रतापगढ़ न्यूज़ :कलयुग में राम नाम से ही लगेगी नैया पार पं. गौरंगी जी महाराज

राम और सीता जी का कन्यादान, सिंदूरदान ,जैसी पारंपरिक रस संपन्न कराई गई और मंगल गीत गाकर विधि विधान से श्री राम व माता सीता विवाह कराया गया । इस पावन पर्व के सभी देवी देवता इसके गवाह बने। और गौरंगी जी ने मार्मिक कथा को आगे सुनाते हुए कहा कि शिव धनुष के टूटने से परशुराम जी बहुत क्रोधित हुए और वे स्वयंवर में पहुंच गए जब प्रभु राम ने उनका परिचय हुआ तो वे समझ गए कि यह कोई और नहीं भगवान विष्णु हैं और वह फिर महेंद्र पर्वत पर तपस्या के लिए चले गए। राम और सीता विवाह की मार्मिक कथा सुनकर लोग भावविभोर हो उठे।

प्रमुख रूप से सुशील मिश्रा लेखपाल, कौशलेंद्र प्रताप सिंह, अशोक शुक्ला, अमित मिश्रा, विनोद सिंह, हर्ष ,सुधीर मिश्रा, आशीष, पीयूष ,कौशल सिंह सहित सैकड़ों भक्त मौजूद रहे।