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Mahakumbha Nagar Prayagraj News:माघ पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ जप, तप और साधना की त्रिवेणी के साक्षी रहे कल्पवास का समापन

जनवाद टाइम्स 15 February 2025
Mahakumbha Nagar Prayagraj News: Kalpavas, which witnessed the triveni of chanting, penance and meditation, concluded with Magh Purnima bathing festival
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रिपोर्ट विजय कुमार

महाकुम्भ नगर। प्रयागराज के संगम तट में लगे आस्था के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक समागम महाकुम्भ में एक महीने से प्रवाहित हो रही जप, तप और साधना की त्रिवेणी की धारा के साक्षी रहे कल्पवासियों की माघ पूर्णिमा स्नान के साथ विदाई हो गई। पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ त्रिवेणी की रेत पर शुरू हुआ कल्पवास का माघ पूर्णिमा स्नान पर्व के साथ समापन हो गया। सभी कल्पवासी स्नान, दान और मां गंगा का आशीष लेकर महाकुम्भ की आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ अपने-अपने गंतव्य की तरफ प्रस्थान कर गए।

Mahakumbha Nagar Prayagraj News: Kalpavas, which witnessed the triveni of chanting, penance and meditation, concluded with Magh Purnima bathing festival

*महाकुम्भ की आध्यात्मिक ऊर्जा बटोर त्रिवेणी के तट से विदा हुए 10 लाख से अधिक कल्पवासी*
महाकुम्भ अध्यात्म और संस्कृति का दुनिया का सबसे बड़ा आयोजन है। महाकुम्भ का हर सेक्टर, हर स्थान ज्ञान, भक्ति और साधना के विविध रंगों से गुलजार है। महाकुम्भ में अखाड़ों के वैभव के अलावा जप, तप और साधना की त्रिवेणी के प्रवाह के साक्षी रहे कल्पवासियों की माघ पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ विदाई हो गई। ब्रह्म मुहूर्त में त्रिवेणी में माघ पूर्णिमा की डुबकी लगाकर कल्पवासी अपने शिविर पहुंचे। कल्पवासियों ने तीर्थ पुरोहितों के सानिध्य में विधि विधान से दान और हवन का अनुष्ठान पूरा किया। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल बताते हैं कि वैसे तो शास्त्र में 84 तरह के दान का उल्लेख है, लेकिन जिसकी जो श्रद्धा होती है उसका दान तीर्थ पुरोहित स्वीकार कर लेते हैं। शैय्या दान, अन्न दान, वस्त्र दान और धन दान आदि का अनुष्ठान माघ पूर्णिमा को किया जाता है। किसी कारण वश अगर कोई कल्पवासी माघ पूर्णिमा को यह अनुष्ठान पूरा नहीं कर पाता तो वह अगले दिन त्रिजटा का स्नान कर यहां से विदा हो जाता है। माघ पूर्णिमा में दस लाख से अधिक कल्पवासी महा कुम्भ की आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर यहां से प्रस्थान कर गए।Mahakumbha Nagar Prayagraj News: Kalpavas, which witnessed the triveni of chanting, penance and meditation, concluded with Magh Purnima bathing festival

*कल्पवासियों की महाकुम्भ से घर वापसी के लिए प्रशासन ने विशेष योजना पर किया अमल*
मेला क्षेत्र से कल्पवासियों की सकुशल घर वापसी के लिए महाकुम्भ प्रशासन ने अलग योजना बनाई है। डीआईजी महाकुम्भ वैभव कृष्ण माघ पूर्णिमा के पहले कल्पवासियों से इसे लेकर अपील कर चुके थे जिसके अनुसार ही महाकुम्भ से कल्पवासियों की रवानगी की योजना पर अमल किया गया। मेला क्षेत्र में पहले से ही आ चुकी भारी भीड़ को देखते हुए कल्पवासियों के वाहनों की मेला क्षेत्र से निकासी मेला में भीड़ छंटने के बाद सुनिश्चित की गई। कल्पवासियों को घर वापस ले जाने वाले ट्रैक्टर व अन्य छोटे वाहनों को मेला क्षेत्र के बाहर बनाई गई पार्किंग में खड़ा करने के लिए कहा गया। श्रद्धालुओं के स्नान के सकुशल सम्पन्न होने के बाद कल्पवासी अपने वाहनों से अपना सामान लेकर विदा हो गए।Mahakumbha Nagar Prayagraj News: Kalpavas, which witnessed the triveni of chanting, penance and meditation, concluded with Magh Purnima bathing festival

*महाकुम्भ से विदा होते भावुक हुए कल्पवासी, बोले दिव्य,भव्य और स्वच्छ महाकुम्भ की स्मृतियां रहेंगी साथ*
महाकुम्भ का आयोजन देश के चार स्थानों प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में होता है, लेकिन कल्पवास की परम्परा केवल प्रयागराज में है। इस वर्ष महा कुम्भ के आयोजन ने भी कल्पवास को विशिष्ट बना दिया। योगी सरकार की तरफ प्रयागराज महाकुम्भ को दिव्य, भव्य और स्वच्छ महाकुम्भ स्वरूप दिए जाने पर मेला क्षेत्र के विभिन्न सेक्टर में प्रवास कर रहे इन कल्पवासियों का अनुभव भी अलग रहा। प्रतापगढ़ जिले से कल्पवास करने आए राम अचल मिश्रा का कहना है कि कल्पवास के उनके इस वर्ष 18 साल पूरे हो गए। वैसे तो संयम और नियम के साथ पूजा पाठ और जप-तप के साथ संतों की वाणी का श्रवण ही उनका उद्देश्य रहता है, लेकिन इस बार कल्पवासियों के शिविरों को गंगा के घाट के नजदीक स्थान देकर प्रशासन ने अच्छा काम किया है। 76 बरस की उम्र में भी त्रिवेणी के तट में इस कपकपाती ठंड में रेत में इन तंबुओं में कल्पवास करने आये सतना के शिवनाथ गहमरी अपने 23वें कल्पवास का इस साल का अनुभव बताते-बताते भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि त्रिवेणी के तट पर मिली शांति और आध्यात्मिक वातावरण की अनुभूति लेकर वह गंगा मैया की गोद से विदा हो रहे हैं।

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