संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
स्थान: हाजीपुर (वैशाली)
हाजीपुर । यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 मार्च से 20 मार्च तक आयोजित किया गया, जिसका संचालन वैज्ञानिक (कृषि अभियंत्रण एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकी) कुमारी नम्रता द्वारा किया गया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केला से मूल्य संवर्धित उत्पाद जैसे केला चिप्स, केला अंजीर, केला पाउडर तथा आटा आधारित उत्पाद जैसे रसगुल्ला, गुलाब जामुन, पेड़ा और लड्डू बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा कच्चे केले से अचार बनाने की विधि भी सिखाई गई।

कार्यक्रम में प्रशिक्षणार्थियों को सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों प्रकार की जानकारी प्रदान की गई, जिससे ग्रामीण युवक एवं युवतियां प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार स्थापित कर सकें।
कार्यक्रम के दौरान वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान द्वारा प्रतिभागियों के उत्पादों का मूल्यांकन किया गया तथा उन्हें इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
वैज्ञानिक (उद्यान) द्वारा बताया गया कि केला बागवानी के बेहतर प्रबंधन एवं कटाई उपरांत होने वाली क्षति को कम करने के लिए केला प्रसंस्करण एक प्रभावी विकल्प है।
वहीं वैज्ञानिक (गृह विज्ञान) डॉ. कविता वर्मा ने बताया कि केला पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें पोटैशियम की प्रचुर मात्रा होती है। यह ब्लड प्रेशर नियंत्रण, हृदय की धड़कन को नियमित रखने, मांसपेशियों के संकुचन और तंत्रिका तंत्र के सुचारू संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समापन समारोह में उद्यमी डॉ. अरुण कुमार एवं अनु कुमारी उपस्थित रहे। उन्होंने युवाओं को केला आधारित उद्यम स्थापित करने, उत्पादों की पैकेजिंग एवं ब्रांडिंग के महत्व पर प्रकाश डाला।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैशाली जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में केंद्र के कर्मचारी ऋचा श्रीवास्तव, रवि कुमार, रमाकांत, सोनू, रंजन, मोहित एवं दीपक का महत्वपूर्ण योगदान रहा।