संवाददाता: राजेन्द्र कुमार
राजापाकर, वैशाली।
कृषि विज्ञान केंद्र, हरिहरपुर (वैशाली) द्वारा राजापाकर प्रखंड के हरपुर मुकुंद गांव में “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र, वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. रत्नेश कुमार झा, कृषि विज्ञान केंद्र, बिरौली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. आर.के. तिवारी, कृषि विज्ञान केंद्र, वैशाली के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अनिल कुमार सिंह तथा कृषि अभियंता इंजीनियर कुमारी नम्रता उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पौधों की समुचित वृद्धि एवं बेहतर उत्पादन के लिए 17 आवश्यक पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। यदि किसान वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य जैविक खादों का उपयोग करते हैं, तो पौधों को आवश्यक पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता एवं स्वास्थ्य में निरंतर सुधार होता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी में सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे पौधों द्वारा पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है। इसका सकारात्मक प्रभाव फसल की गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है।
कार्यक्रम में किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लेते हुए अपने विचार एवं अनुभव साझा किए। इसी क्रम में वैशाली जिले के हाजीपुर प्रखंड के गुर्मियां गांव में भी संतुलित उर्वरक उपयोग विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक साबित हुआ। इससे किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरणा मिली।
कार्यक्रम में प्रगतिशील किसान वीरचंद्र जी, प्रभु दयाल सिंह, तेज नारायण सिंह, धर्मेंद्र जी, वीरेंद्र सिंह, पवन कुमार सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।