Breaking News आर्टिकल इटावा उतरप्रदेश सम्पादकीय

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।। : डा. धर्मेंद्र कुमार

लेखक: डा. धर्मेंद्र कुमार
इटावा: हम बुरे हैं ,बस यह बात स्वीकार नहीं कर सकते हैं l दूसरों की तुलना में खुद को सर्वोच्च साबित करने में युग बीत गए हैं l समय, काल, परिस्थितियों में हमारी गुलामी चाहे वह देशगत रही हो या जातिगत ,उसका संपूर्ण उत्तरदायित्व हमारा स्वयं का हैl किंतु हम अंगुली हमेशा दूसरों की ओर करते रहे l हम भूल गए हैं कि 3 अंगुली हमारी ओर इशारा करती रही, जिसकी संख्या बहुमत से अधिक रही l

पूर्व काल की गुलामी का उलाहना देते देते हमारा वर्तमान भी गुलामी की ओर अग्रसर हो गया है l हम हमारी स्वच्छंदता को जीवंत नहीं रख पा रहे हैं l वर्तमान भारत में हजारों संगठन भीम, मीम, गांधी, लोहिया, चरण सिंह को अपना पूर्णतया आदर्श मानते हैं l ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, रामा स्वामी ,राजा राममोहन राय, विनोबा भावे, दयानंद सरस्वती, विवेकानंद की शिक्षाओं पर वक्तव्य देते अवश्य नजर आएंगे किंतु उनकी शिक्षाओं पर एक फ़ीसदी अमल करने को तैयार नहीं हैंl समाज के कुछेक या बहुसंख्यक जन रामकृष्ण ,ईसा मसीह, पैगंबर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलेहे वसल्लम का जिक्र करते उनके लिए बड़े-बड़े बड़े कार्यक्रम करते दिखाई देंगे दूसरे लोगों में ऐसे कार्यक्रम कराने की होड़ लगी है कि शायद स्वर्ग जन्नत हमें भी प्राप्त हो जाए l कोई कल्पित दोजख ,नर्क में जाने के लिए तैयार नहीं हैl

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हमें गुलामी के खिलाफ जंग लड़नी थी जिसमें हमारे लाखों जांबाज लडाके फिरंगी हुकूमत की गोली से मरे या उन्हें सार्वजनिक पेड़ों ,चौराहों पर फांसी दी गई l चंद्रशेखर आजाद ने तो स्वयं को गोली मारना अपना देश धर्म समझा वहीं बहादुर शाह जफर, मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चंद्र बोस ,रामप्रसाद बिस्मिल, खुदीराम बोस, अशफाक उल्ला खान जैसे तमाम बलिदानों का इतिहास में जिक्र है करोड़ों बलिदानीयों को इतिहास में उनके बलिदानों कोई स्थान नहीं मिला l वहीं देश की खुफिया जानकारी प्रदान करने में देश के बलिदानों -बलिदानियों को तबाह करने में देश की अग्रणी संस्था आरएसएस ने देश की आजादी के बाद भी देश का सम्मान तिरंगा तथा देश का प्रजातांत्रिक संविधान स्वीकार करने में आज तक आपत्ति दिखाई हैl गांधी व गांधी विचारधारा को तहस-नहस करने का कार्य किया किंतु हम उसे नहीं रोक सके और दोषारोपण एक दूसरे पर करते नजर आए l गांधी, डॉक्टर अंबेडकर, डॉक्टर लोहिया , चौधरी चरण सिंह, मान्यवर कांशी राम सरीखे युग परिवर्तको का सपना जाति तोड़ो समाज जोड़ो, सर्वहारा वर्ग का उत्थान, गांव से गरीबी खत्म करना, किसानों मजदूरों को उनका हक प्रदान करना, महिला सशक्तिकरण , महिला सुरक्षा, कृषि उपज का वाजिब मूल्य प्रदान करवाना, दलितों पिछड़ों अल्पसंख्यकों को सशक्त बनाना व शासक बनाना, पचासी फीसद जनता को उन्नति की ओर ले जाने के लिए अलग-अलग विचारकों द्वारा देशकाल परिस्थितियों के हिसाब से अलग-अलग कार्यक्रम संचालित किए गए, किंतु सब का उद्देश्य समान रहा वर्तमान समय में उनके नाम से तमाम सामाजिक संगठन, राजनीतिक दल संचालित हैं , किंतु इन सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों के संचालक एक मंच पर आने में अपनी तौहीन समझते हैं l ऊपर से समाज में लालच बस फूट डालने में अग्रणी भूमिका अदा कर रहे हैं और r.s.s. पोषक भारतीय जनता पार्टी से लड़ रहे हैं l 15% की आबादी आज 100 फ़ीसदी आबादी पर राज्य कर रही है l

भूल होना स्वाभाविक है किंतु भूल सुधार न करना और बार बार गलती करना अन्याय और बदतमीजी है l समाज को अब समझ लेना चाहिए कि भाजपा शासक बन जाती है का जिम्मेदार आज के सामाजिक संगठन व राजनीतिक दल ही हैं l समाज को इन फूट पैदा करने वाले संगठनों को सीख सिखाने की जरूरत है, तो शायद भाजपा से लड़ना भी नहीं पड़ेगा और वह स्वत ढेर हो जाएगी l
भीम मीम ,डॉक्टर लोहिया, चौधरी चरण सिंह, कांशी राम आदर्श शिक्षाएं कारगर साबित होगी l समाजवाद को सही मायने में जब गैर कांग्रेस वाद का नारा देकर लागू किया गया तब देश में नई चेतना जागृति का संचार हुआ अब देश प्रेमियों समाज प्रेमियों से अनुरोध है कि गैर भाजपा बाद का नारा बुलंद करके घृणा, नफरत की खेती करने के लिए खत्म करने के लिए भीम , मीम, डॉक्टर लोहिया, चौधरी चरण सिंह ,कांशी राम विचारधारा पोशकों को एक मंच पर आना होगा l आओ हम सब मिलकर नई इबारत लिखेंगे आप सभी का हम खुले मन से स्वागत करते हैं l