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इंटरनेशनल चाईल्डहुड कैंसर डे पर कैंसरपीड़ित बच्चों ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखे

संवाददाता महेंद्र बाबू
इंटरनेशनल चाईल्डहुड कैंसर डे के अवसर पर उत्तर प्रदेश में कैंसरपीड़ित बच्चे और उनके अभिभावक प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनसे चाईल्डहुड कैंसर के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाए जाने का आग्रह कर रहे हैं।
हैलो, अंकल मोदी। मेरा नाम शौर्य है और उम्र 7 साल है। मुझे खून का कैंसर है। मेरी मां दिन रात रोती रहती है। जब डॉक्टर अंकल मेरे पास आते हैं, तो मेरी मां की आंखों से आंसू रुकते नहीं हैं। मेरे पापा के पास ज्यादा पैसे नहीं हैं। डॉक्टर अंकल कह रहे थे कि मेरे इलाज के लिए बहुत ज्यादा पैसे चाहिए। आपने पूरे देश को कोरोना वैक्सीन दी है। अंकल मुझे भी जीवन दीजिए। मेरे जैसे बच्चों का इलाज कराईये। मैं आपको यह ग्रीटिंग कार्ड भेज रहा हूँ। देखिए, आपने कोरोना के लिए जो किया, उसकी बधाई देने के लिए मैंने कार्ड पर अपने हाथ बनाए हैं। मैं चाहता हूँ कि आप मेरा हाथ थामें और मुझे भी स्वस्थ बनाएं।
ये शब्द उस मासूमियत के गवाह हैं, जो जीवन के लिए मौत से संघर्ष कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय चाईल्डहुड कैंसर डे के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश से शौर्य जैसे अनेक बच्चों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को ग्रीटिंग कार्ड भेजे हैं। जानलेवा कैंसर से पीड़ित होने के बाद भी इन बच्चों ने न केवल ग्रीटिंग कार्ड्स पर अपने हाथ बनाए, बल्कि कोरोना वैक्सीन के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद भी दिया।
यह प्रयास कैनकिड्स किडस्कैन (भारत में चाईल्डहुड कैंसर में परिवर्तन लाने के लिए राष्ट्रीय सोसायटी) द्वारा माह भर चलने वाले आईसीसीडी अभियान को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। यह अभियान नीति आयोग के सदस्य, डॉक्टर वी. के. पॉल द्वारा लॉन्च किया गया था (स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र का नेतृत्व करता है)। यह अभियान 21 शहरों में 68 कैंसर केंद्रों में चल रहा है और हजारों बच्चों एवं उनके परिवारों की पहचान कर रहा है, जो कैंसर के निदान से जूझ रहे हैं। इसका उद्देश्य जागरुकता बढ़ाना और भारत में कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए बेहतर जिंदगी का समर्थन करना है।
कैनकिड्स की चेयरमैन, पूनम बगाई ने कहा, ‘‘हर साल दुनिया में लगभग तीन लाख बच्चे कैंसर से पीड़ित होते हैं, जिनमें से एक चौथाई भारतीय हैं। देश के लगभग 250 अस्पतालों में कैंसर मरीजों का इलाज होता है, लेकिन इलाज के लिए वहां तक केवल 30 प्रतिशत बच्चे ही पहुंच पाते हैं। इस समय यह बहुत जरूरी है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना में चाईल्डहुड कैंसर को शामिल किया जाए।’’
आईआईसीसी-3 इंडिया 7 पॉपुलेशन रजिस्ट्री या वर्ल्ड-वाईड रजिस्ट्रीज़ के मुताबिक हर साल उत्तर प्रदेश के 14,700 बच्चों को चाईल्डहुड कैंसर होता है, जिसमें यह राज्य देश में सबसे आगे है। दुख इस बात का है कि केवल 21 प्रतिशत बच्चे कैंसर ट्रीटिंग सेंटर तक पहुंच पाते हैं, यानि 79 प्रतिशत बच्चों को राज्य में या राज्य से बाहर कोई इलाज नहीं मिल पाता। ज्यादातर अस्पताल लखनऊ, वाराणसी, नोएडा में हैं, लेकिन यहां पर 15 प्रतिशत से ज्यादा मरीज नहीं आते, क्योंकि कुछ मरीज इलाज के लिए दिल्ली या मुंबई चले जाते हैं। 5 साल पहले, नेशनल सोसायटी फॉर चाईल्डहुड कैंसर, कैनकिड्स किडस्कैन ने गो गोल्ड यूपी लॉन्च किया और 2000 से ज्यादा चाईल्ड कैंसर मरीजों, अभिभावकों एवं सर्वाईवर्स ने ताजमहल के रॉयल कॉम्प्लेक्स में आयोजित पहली चाईल्डहुड कैंसर प्रदर्शनी में भाग लिया। 2019 में एक बार फिर मुंबई से ‘हक की बात’ चाईल्डहुड कैंसर रैली लखनऊ और माननीय प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी तक निकाली गई। इसमें देखभाल की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया गया। चाईल्डहुड कैंसर सर्वाईवर, संदीप और विकास, जिनके परिवार उनके इलाज के लिए मुंबई में आकर रहने लगे, उन्होंने बताया, ‘‘मैं जहां जीवित रहता हूँ या नहीं, इसका निर्णय वो जगह क्यों ले, जहां मेरा जन्म हुआ है।’’
ताज ने कैंसरपीड़ित बच्चों के लिए ‘गो गोल्ड’ का आयोजन उसी प्रकार किया गया, जैसे वाराणसी में मां गंगा ने किया, लेकिन राज्य में प्रगति अभी भी मंद है और चाईल्डहुड कैंसर को अभी भी प्राथमिकता नहीं दी जाती है। पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी सेंटर्स एवं हैल्थ प्रोफेशनल्स की कमी, रिफरल पाथवे विकसित करने की जरूरत एवं राज्य में शेयर्ड केयर मॉडल, प्राथमिक से जिला स्तर और टर्शियरी कैंसर सेंटर तक मरीज के पहुंचने एवं जागरुकता की कमी, निदान एवं इलाज की कमी के चलते इस राज्य के अनेक बच्चे मौत का शिकार होते जा रहे हैं। नेशनल सोसायटी, कैनकिड्स ने स्वास्थ्य एवं मेडिकल शिक्षा विभाग से संपर्क कर नॉलेज एवं टेक्निकल पार्टनर के रूप में राज्य में चाईल्डहुड कैंसर को प्राथमिकता में लाने के लिए एक समझौतापत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।