Bihar News: गंडक में अनियंत्रित खनन से बी-गैप तटबंध पर मंडराया खतरा, बढ़ी बाढ़ की आशंका

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संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण।

गंडक नदी के दाएं तट पर भारत-नेपाल द्विपक्षीय समझौता, 1959 के तहत निर्मित बी-गैप तटबंध एवं अन्य सुरक्षा बांध नेपाल के 84 गांवों की लगभग 75 हजार आबादी को बाढ़ से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। वाल्मीकि बैराज के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में स्थित यह तटबंध अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यहां गंडक नदी तटबंध पर सीधे प्रहार करते हुए लगभग 100 डिग्री के कोण पर अपनी दिशा बदलती है।

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58वीं गंडक उच्च स्तरीय स्टैंडिंग समिति ने निरीक्षण के उपरांत बी-गैप तटबंध के ठोकर संख्या-16 एवं 17 के मध्य तटबंध को सुदृढ़ करने तथा बिट्यूमिनस सड़क निर्माण की संस्तुति की थी। हालांकि गंडक नदी में अनियंत्रित खनन और भारी वाहनों के लगातार आवागमन के कारण तटबंध की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खनन गतिविधियों से तटबंध के संवेदनशील हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

30 अप्रैल 2026 को काठमांडू में आयोजित नेपाल-भारत संयुक्त गंडक परियोजना की 11वीं बैठक में दोनों देशों के बीच समन्वय स्थापित कर वैज्ञानिक तरीके से खनन कराने का निर्णय लिया गया था। बैठक में यह भी सहमति बनी थी कि खनन कार्य इस प्रकार किया जाए जिससे तटबंधों तथा नदी किनारे बसे गांवों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

इसके बावजूद आरोप है कि नेपाल के सुस्ता गांव पालिका क्षेत्र में बिना समुचित समन्वय के खनन कार्य कराया जा रहा है तथा भारी वाहनों का परिचालन भी जारी है। इससे तटबंध की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले को लेकर नवलपरासी के जिला अधिकारी एवं भू-अर्जन संपर्क अधिकारी शोभित हलुवाई तथा महराजगंज सिंचाई खंड-2 के अवर अभियंता रविंद्र यादव के बीच वार्ता हुई। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि खनन केवल उन्हीं क्षेत्रों में कराया जाएगा, जहां नदी के दोनों किनारे नेपाल की सीमा में स्थित हैं, तथा तटबंधों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में जारी खनन गतिविधियां भविष्य में बाढ़ के खतरे को बढ़ा सकती हैं। वहीं सहायक अभियंता रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। साथ ही नेपाल के जल स्रोत एवं सिंचाई विभाग, जावलाखेल, ललितपुर (काठमांडू) को भी पत्र भेजकर खनन कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई है।

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने तटबंध की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संभावित बाढ़ संकट से बचाव के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

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