आशीष कुमार
इटावा/जसवंतनगर: हिंदू शास्त्रों में कहा गया है कि जेष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा जी का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था इसीलिए इस तिथि को जो बहुत ही शुभ तिथि थी क्योंकि इसमें 10 शुभ योग गोचर हो रहे थे इसलिए इसे गंगा दशहरा का नाम दिया गया ।

गंगा अवतरण की एक प्रमुख कथा भागीरथ से भी जुड़ी है। ऋषी के श्राप से राजा सगर के साठ हजार पुत्रों जलकर राख हो गए थे उनके उद्धार के लिए गंगा का अवतरण आवश्यक था। गंगा को विष्णु पदी भी कहा गया है। राधा के क्रोध से डरकर इन्होंने अपना स्थान ब्रह्मा जी के कमंडल में बनाया। भागीरथ ने कठोर प्रयत्न के बाद ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर गंगा को पृथ्वी पर लाने का वरदान प्राप्त किया परंतु गंगा जी का वेग संभालने की शक्ति भूलोक में किसी के पास नहीं थी तो उन्होंने भगवान शिव को उसके वेग को रोकने के लिए प्रसन्न किया। स्वर्ग से आ रही गंगा के वेग को भगवान शंकर ने अपनी जटाओं में रोक लिया।
गंगा दशहरे का महत्व गरुण पुराण स्कंद पुराण में कई स्थानों पर उल्लेख किया गया है। गंगा दशहरे पर गंगा का नाम लेने सुनने देखने पीने स्पर्श या स्नान करने वालों के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस अवसर पर 10-10 सामग्री लेने का विधान है। इसी तरह इसके अपवाद स्वरूप 10 पापों का भी विचार किया जाता है।
गंगा दशहरा मनाने के लिए नगर किनारे कचौरा रोड व अन्य स्थानों पर पुलिस प्रशासन की सख्त ड्यूटी के बीच दूर से ही पूजन दर्शन करने की छूट रही। यहां छोटी छोटी दुकानें लगाकर लोगों ने इसे संचित मेले का भी रूप दे दिया था। बच्चों के खिलौने व एक दो झूले के अलावा चाट पकौड़ी आइसक्रीम वाले भी नजर आए।
यहां कचौरा रोड स्थित नहर पुल के आसपास तैनात पुलिसकर्मी श्रद्धालुओं को सख्त हिदायत के साथ नहर की कच्ची किनारी की ओर बढ़ने से रोक रहे थे। केवल पुल के ऊपर दूर से ही मंडप पूजन सामग्री चढ़ावे इत्यादि की अनुमति थी। समाचार लिखे जाने तक किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं थी।
बलरई नहर पुल, राजपुर, सिरहौल, जगसौरा नहर पुल पर भी इसी तरह पुलिस प्रशासन की सख्ती दिखाई दी। किसी भी तरह कोई भीड़ भाड़ नहीं होने दी गई और श्रद्धालुओं ने गंगा दशहरा सादगी के साथ मनाया।