Etawah News: Blankets are distributed to needy people in the cold winter
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Etawah News: कड़ाके की ठंड में जरूरतमंदों को बांटे कम्बल, ओढ़ाई स्नेह की चादर

संवाददाता महेश कुमार

इटावा: सर्दी की रातें गरीबों के लिए बहुत भारी पड़ती हैं। उन्हें तलाश रहती है किसी ऐसे मसीहा की जो आकर उनको ठंड से बचा सके। ठिठुरते हुए रात न गुजारनी पड़े। बहुत से गरीब इन सर्दी की रातों में खुले आसमान के नीचे कांपते रहते हैं। हालांकि ऐसे कई लोग हैं जो गरीबों की पीड़ा को समझते हुए नेक कार्य के लिए आगे आते हैं और गर्म कपड़े, कम्बल आदि का वितरण कर लोगों को मानव सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। सर्द होती रातों में ठंड से कापंते गरीब, असहाय, लाचार लोगों को गर्माहट देने की ठोस पहल के तहत कड़ाके की ठंड में गरीब बच्चों व बुजुर्गों को गर्म कपड़ों के अभाव में न जीना पड़े इसके लिए समाजसेवी  संस्था अधिकारों की ताकत के सदस्यों ने अध्यक्ष महाशक्ति जी के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों  में गर्म कम्बल बांटे।

 

Etawah News: Blankets are distributed to needy people in the cold winter

प्रदेश अध्यक्ष महाशक्ति, प्रदेश सचिव जयवीर सिंह, प्रदेश कोषाध्यक्ष सूर्य शक्ति, जिला मीडिया प्रभारी शिवम शंखवार, जिला अध्यक्ष फार्मेसी विंग विशाल बाबू, कार्यकारिणी सदस्य गोलू सोनी, शनि, गुलशन बाबू व रामजी आदि मौजूद रहे। हमारी टीम को यह भली-भांति ज्ञात है कि दान गुप्त रूप से प्रदान करना चाहिए, परंतु हम आप सभी को इस बात से परिचित करा देना चाहते हैं कि जो लोग हमें सहयोग करते हैं तो हमारा भी दायित्व बनता है कि हम उनको साक्ष्य उपलब्ध कराएं कि हमने उनके सहयोग का सदुपयोग किया है। जिससे आगे आने वाले समय में वो और अधिक सहयोग कर पाए व उनका हम पर विश्वास और दृढ़ हो।

हम लोग अपने पूर्वजों से गरीब, असहाय लोगों की सहायता करना सीखे हैं

समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष महाशक्ति ने बताया कि उन्होंने गरीब परिवार को ठंड से बचाने का प्रयास किया है। कड़ाके की सर्दी में गर्म कपड़े लेकर बुजुर्ग व महिलाओं के मुंह से दुआएं ही निकल रही थीं। शहर के लोगों से अपील की कि जो लोग जिन गर्म वस्त्रों को वह अपने प्रयोग में नहीं ला रहे हैं ऐसी वस्तुओं को अपने आस-पास की झुग्गी-झोंपड़ियों में देकर गरीब लोगों का सहयोग करें ताकि वे भी ठंड से अपनी बचाव कर सकें। गरीब की सहायता करना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने कहा कि हम लोग अपने पूर्वजों से गरीब, असहाय लोगों की सहायता करना सीखे हैं। हमेशा यही प्रयास रहता है कि गरीब लोग दरवाजे से खाली हाथ न लौटे।