Bihar news अंग्रेजी साम्राज्य का अंत देखने के सपनों के साथ शहादत दिये जगन्नाथ पुरी

Bihar news Jagannath Puri gave up his life with the dream of seeing the end of the British Empire
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संवाददाता मोहन सिंह बेतिया

24 अगस्त 1942 को शहीद हुए लौकरिया निवासी जगन्नाथ पुरी के शहादत दिवस पर आज ग्रामिणों ने उन्हें फुल मालाएँ चढ़ा याद किया।

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फुल माला चढाने वालों में भाकपा माले नेता सुनील कुमार राव, अप्पू राव,बब्लू सिंह, मनोज सिंह लौकरिया विकास मंच के राकेश राव, अभिमन्यु राव, सत्यनारायण शर्मा,अरविंद पासवान, हैदर अली आदि मौजूद रहे। उक्त अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए माले नेता सुनील कुमार राव ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गॉंधी के आह्वान पर ऐतिहासिक अंग्रेज़ों भारत छोड़ों आंदोलन चंपारण में 24 अगस्त 1942 को मनाया गया जहां बेतिया में अंग्रेजी हुकूमत के तत्कालीन अनुमंडलीय कार्यालय पर तिरंगा झंडा फहराने के लिए सभी दिशाओं से लोग पहुँचने लगे । सुबह से ही गाँव गाँव से लोग टोलियाँ बना बना देश को आजाद कराने की जज्बात लिए पहुंचने लगे। दस ग्यारह बजते बजते दसियों हजार लोगों का हुजूम बेतिया के ऐतिहासिक बड़ा रमना मैंदान में पहुँचा जहां आजादी के दिवाने झंडा फहराने के लिए आगे बढ़ने लगे। उधर अंग्रेज़ी राज के कारिन्दे इसे रोकने के लिए तत्कालीन अंग्रेज अधिकारी मिस्टर टॉमी के आदेश पर गोलियां बरसाने लगे। पर आजादी के दिवाने मानने वाले कहाँ थे। इसी हुजूम में शामिल लौकरिया के 13 वर्षीय बालक जगन्नाथ पुरी शामिल थे। अंग्रेज अधिकारी के आदेश पर गोलियां चलने पर काफी बौखला गए और एक पत्थर जोर से चलाए जो अंग्रेज को लगा इसपर अंग्रेज अधिकारी और बौखलाहट में गोलियां चलवाने लगा। एक हाथ में तिरंगा झंडा लिए जगन्नाथ पुरी की सीने में गोली लगी और देखते देखते भारत माता के आठ सपूत मातृभूमि की आज़ादी के लिए शहीद हुए। जब गांधी का भारत छोड़ो अभियान की घोषणा हुई ऐसे में चंपारण कहा पिछे हटने वाला था। गांधी के आह्वान के बाद अन्य क्रान्तिकारियों के साथ जगन्नाथ पुरी भी लोगों को संगठीत कर बेतिया चलने के लिए प्रेरित करने लगे। अपने पिता शिव गोविंद पुरी के एकलौता संतान होने के बावजुद देश को आजाद कराने का ऐसा जज्बा उनके अंदर था कि अपने एक साथी के कहने पर कि वहां गोलियां चलेगी इसकी परवाह किये बगैर दार्शनिक अंदाज में कहा कि बेल भर के मुड़ी (सिर) रही ना रही देश त आजाद त हो जाइ। अंग्रेज के जूल्म त बंद हो जाइ।

Bihar news Jagannath Puri gave up his life with the dream of seeing the end of the British Empire लोग बताते हैं कि वे अपने से बड़े बुजुर्गों को भी 24 अगस्त को बेतिया चलने के लिए प्ररित करते थे। उनके शहादत के बाद लौकरिया के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल उनके अन्य सहयोगियों में इंद्राशन राव, रोझा राउत, रामनारायण राव आदि उनके शव को लाए और उसके घर के बगल में उन्हें दफना दिया गया। ग्रामीण और माले नेता सुनील कुमार राव ने बताया कि जन सहयोग से उनकी प्रतिमा लगया गया है जहां प्रतिवर्ष 15 अगस्त और 26 जनवरी को प्रशासनिक स्तर पर उनको सलामी दी जाती है और 24 अगस्त उनकी शहादत दिवस पर फुल मालाएँ चढ़ा उनको याद करते हैं गाँव वाले।

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