Bihar news : चुनाव चिह्न से जनता को लुभाते प्रत्याशी
संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
पश्चिम चम्पारण का नवनिर्मित बेतिया नगर निगम पहली बार निगम के चुनाव को लेकर काफी सुर्खियों में है। भले ही यह दलगत चुनाव नहीं हो रहा परन्तु प्रत्याशियों को पीछे से कई राजनीतिक पार्टियों ने अपना समर्थन गुपचुप तरीके से दे रखा है। जिसे खुलकर तो नहीं देखने को मिल रहा पर प्रचार प्रसार, नामांकन और अब सोशल मीडिया में खुलकर समर्थन और टांग खींच खांच से चुनावी माहौल गर्म होकर सुर्खियों में आ चला है। माह का अंतिम दिन और प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न का आवंटन उन सुर्खियों में गजब का उत्साह सराबोर कर दिया है। प्रत्याशियों के चहेते समर्थकों ने तो इस तरह कमान संभाल रखा कि मानों यदि इवीएम नहीं दबाना होता तो समर्थक चुनावी चिन्हों और पोस्टरों से ही मतदान करा कर अपने अपने प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित कर देते। पर अफसोस की देश का संविधान लोकतांत्रिक चुनाव के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को चुनने का अधिकार दे रखा है जिसमें हर आम से खास एक मतदान पर अपना मत देकर अपना जनप्रतिनिधि का चुनाव करता है।
बेतिया नगर निगम से मुख्य पार्षद (मेयर) पर प्रत्याशियों की चुनावी चिन्ह आवंटन के साथ ही अपने भाग्य का भरोसा उस चिन्ह के भरोसे कर रखा है। निगम के मुख्य पार्षद के कुल 9 प्रत्याशी चुनावी मैदान में अपने अपने चुनावी चिन्हों के साथ शंखनाद कर दिया है।
पूरे निगम क्षेत्र में तेज रफ्तार से चलने वाली मोटरसाइकिल के साथ लाल बाजार की गरिमा देवी सिकारिया तेजी से अपनी मोटरसाइकिल का गेयर लगा कर रफ्तार तो बढ़ा दिया है जिससे अन्य प्रत्याशी उनकी मोटरसाइकिल की रफ्तार का पीछा भी शुरू कर दिया है। जिसमें अपने कबूतर के साथ पावर हाउस की सुरभि घई भी इस कदर उड़ान भर दी हैं कि मोटरसाइकिल का पीछा अपने पंखों से करना शुरू कर दिया है। पर कबूतर सिर्फ दिन में ही उड़ सकता है और जैसे ही रात होगी वो अपने खोप (घोंसला) में चला जाएगा क्योंकि मोटरसाइकिल की तरह हेडलाइट नहीं होती है। पर कबूतर के शांति व समृद्धि के प्रतीक होने के कारण मोटरसाइकिल कितना शांति व समृद्धि लाएगा कबूतर के सामने यह जनता के मतदान से ही अंदाजा लग सकता है। वहीं महावत टोली की मोतिबाला की टमटम आज की सड़कों पर कितने देर दौड़ेगी और किस स्पीड से दौड़ेगी कि मोटरसाइकिल के आधुनिक हाई स्पीड को ओवरटेक करेगी यह तो चुनाव की सरगर्मी ही तय कर देगी।
जिस चुनावी चिन्ह चरखा को लेकर तीन लालटेन चौक की सुषमा देवी निगम में चरखा चलाना चाह रही हैं वो भी काफी दिलचस्प है क्योंकि चरखे के दिन चम्पारण के लोगों ने भूला कर आधुनिकता के दौर में चनपटिया स्टार्टअप जोन के अत्याधुनिक मशीनों को काफी महत्व दे रखा है। ऐसे में चरखा के साथ स्टार्टअप जोन का ख्याल भी कर पाना विकास की हवा निकालने के समान होगा। पर लाल बाजार की रेखा जयसवाल अपने चुनावी चिन्ह सिलाई मशीन से जहाँ आत्मनिर्भर बनाने के दावों को करती दिखती हैं पर सभी महिलाएं अब सिलाई बुनाई से भागती दिख रही हैं और रेडिमेड के बढ़ते चलन और अत्याधुनिक मशीनों ने सिलाई मशीन का कद छोटा कर रखा है। रानी पकड़ी की फुलझरी देवी ने तो पहले ही ताला चाबी लगाकर सबको परेशान कर दिया है कि आखिर ताला किसके लिए होगा और चाबी का इस्तेमाल कौन करेगा?
बानुछापर की काजल कुमारी निगम की जनता को सिर्फ कप में चाय पिलाकर चुनावी शतरंज जीतने की कमर कस तो लिया पर वो भूल गई कि उनके ही बानुछापर की गीता देवी हर घर की जरूरत नल के साथ उनके ही पीछे नहीं बल्कि सभी प्रत्याशियों के पीछे पड़ गई हैं। क्योंकि बिहार सरकार की सात निश्चय नल और जल का नल तो गीता देवी अपने साथ लिए निगम के घरों में जगह बनाने में लग गई हैं। ऐसे में भला मातृत्व शक्ति रूप वरिष्ठ महिला प्रत्याशी रजिया बेगम भला कैसे अपने मातृत्व को कम कर दें वो तो इस आपा धापी में अपने प्रेशर अ कुकर से भला खाना बनाने से क्यों पीछे रहें और जीत चाहे जिसकी भी हो पर भोजन की पार्टी तो सबको चाहिए। अब देखना होगा कि उनको विजयी बनाकर पार्टी लेने कौन कौन आते हैं?
चुनावी पंडितों की मानें तो नौवों प्रत्याशियों की जो चुनावी दौर शुरू हुई हैं उनमें सबकी हार-जीत मोटरसाइकिल से ही तय होनी है। ऐसे में कौन अपने चुनावी चिन्ह से मोटरसाइकिल की हवा निकालेगा यह दूसरे चरण का मतदान 20 अक्टूबर को ही इवीएम में कैद होकर तय होना है।