संवाददाता : मोहन सिंह
बेतिया, पश्चिमी चंपारण। आइसा (AISA) और इंकलाबी नौजवान सभा के आह्वान पर 25 जुलाई को बेतिया में बिहार बंद का आयोजन किया गया। बंद के दौरान छात्र-युवाओं ने दिल्ली जंतर-मंतर और पटना में छात्र नेताओं पर कार्रवाई के विरोध, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक के दोषियों पर कार्रवाई, एनटीए को भंग करने और नई शिक्षा नीति वापस लेने सहित कई मांगों को लेकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बंद के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा बेतिया की सड़कों पर उतरे तथा केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी पटना में गिरफ्तार आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय, सचिव दीपांकर मिश्रा, सबा आफरीन, दिव्यम, कुमार परवेज सहित अन्य छात्र नेताओं और माले विधायक संदीप सौरभ की रिहाई की मांग कर रहे थे।
बंद का नेतृत्व कर रहे छात्र और युवा संगठनों के नेताओं ने कहा कि देश में लगातार हो रहे पेपर लीक मामलों से करोड़ों छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने एनटीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे भंग करने, परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और नई शिक्षा नीति-2020 को वापस लेने की मांग की। छात्र नेताओं का कहना था कि नई शिक्षा नीति गरीब एवं सामान्य परिवारों से आने वाले छात्रों के लिए उच्च शिक्षा को कठिन बना रही है।
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने दिल्ली एवं पटना में छात्र आंदोलन पर हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए गिरफ्तार छात्र नेताओं और जनप्रतिनिधियों की बिना शर्त रिहाई की मांग की। साथ ही दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पद से हटाने की भी मांग रखी।
बिहार बंद के दौरान बेतिया समाहरणालय चौक पर कई घंटों तक प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।