संवाददाता: पंकज कुमार
आलापुर, अंबेडकरनगर
अंबेडकरनगर जिले के थाना जहांगीरगंज क्षेत्र स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा, माडरमऊ शाखा पर एक परिवार ने ऋण का पूरा भुगतान और नो ड्यूज़ प्रमाणपत्र मिलने के बावजूद मकान, दुकान एवं अन्य संपत्ति के मूल दस्तावेज वापस न करने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने शाखा प्रबंधक रफत कमाल खान की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और मूल कागजात वापस दिलाने की मांग की है।

पीड़ित परिवार के अनुसार, ग्राम पंचायत मामपुर, तहसील आलापुर निवासी स्वर्गीय संतोष कुमार पुत्र स्वर्गीय रामकृपाल ने 18 अक्टूबर 2006 को बैंक ऑफ बड़ौदा, माडरमऊ शाखा से ट्रेडर ऋण स्वाभिमान योजना के अंतर्गत ऋण (खाता संख्या 20570400000461) लिया था। लंबी बीमारी के कारण वर्ष 2011 में उनकी मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि वर्ष 2013 में बैंक अधिकारियों ने दबाव बनाकर ऋण की शेष राशि जमा कराई, लेकिन इसके बाद भी मूल दस्तावेज वापस नहीं किए गए।
परिवार का कहना है कि ऋण का पूरा भुगतान होने के बाद बैंक ने 24 अक्टूबर 2017 को नो ड्यूज़ प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया, फिर भी मकान, दुकान एवं अन्य संपत्ति के मूल कागजात आज तक बैंक के पास ही पड़े हैं।
पीड़ित परिवार के सदस्य आर.के. ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से वे लगातार बैंक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन हर बार “सर्वर नहीं है”, “नेटवर्क नहीं है”, “बाद में आइए” अथवा “कर्मचारी व्यस्त हैं” जैसे कारण बताकर उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। उनका कहना है कि इस वजह से उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तथा संपत्ति से जुड़े आवश्यक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
परिवार ने मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, क्षेत्रीय प्रबंधक तथा लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) से शिकायत कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, मूल दस्तावेज वापस दिलाने तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय एवं विधिक कार्रवाई करने की मांग की है।
इस संबंध में बैंक का पक्ष जानने के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा, माडरमऊ शाखा के सीयूजी नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। फोन बैंक के एक कर्मचारी ने रिसीव किया। कर्मचारी ने बताया कि शाखा प्रबंधक अवकाश पर हैं तथा उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है।