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Agra UP । मासूम की हत्या के जुर्म में बेगुनाहों ने काटी पाँच साल चार महीने की जेल

संवाददाता सुशील चंद्र । आगरा के अपर जिला जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने पांच वर्ष और चार माह से जेल में बंद बाह क्षेत्र के जरार गावँ निवासी दंपती को मासूम की हत्या के मामले में बेगुनाह पाते हुए रिहा करने का आदेश दिया। पुलिस द्वारा इन्हें जेल भेजा गया था, जबकि हत्या किसी और ने की थी जो आज तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।अदालत ने यह भी आदेश किया है कि जांच अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए और फिर से जांच कर असली हत्यारों का पता लगाया जाए।

घटना एक सितंबर, 2015 की है जिसके अनुसार जरार निवासी योगेंद्र सिंह का पांच साल का बेटा रंजीत सिंह उर्फ चुन्ना शाम तकरीबन साढ़े पांच बजे घर से अपनी मां श्वेता से अंबरीश गुप्ता की दुकान पर जाने की कहकर गया था। रात तक लौटकर नहीं आया तो योगेंद्र सिंह ने बेटे की तलाश की। अंबरीश की दुकान बंद मिली। कई लोगों ने बच्चे को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला।

अगले दिन दो सितंबर 2015 को सुबह 11 बजे कोतवाल धर्मशाला के पास बृह्मचारी गुप्ता के बंद पड़े मकान में रंजीत का शव पड़ा मिला था। इसमें योगेंद्र सिंह ने बेटे की हत्या का आरोप मोहल्ला मस्जिद निवासी नरेंद्र सिंह और उसकी पत्नी नजमा पर लगाया था क्योंकि उनसे काफी दिन पहले झगड़ा हुआ था तब दोनों ने धमकी दी थी।

घटना से एक दिन पहले श्वेता ने बेटे रंजीत को नजमा की गोदी में बैठा हुआ देखा था वह नमकीन खा रहा था इसी शक में उन्होंने सोचा कि दोनों ने रंजिश में चाकुओं से गोदकर रंजीत को मार डाला।
और स्थानीय पुलिस द्वारा नरेन्द्र और नजमा को जेल भेज दिया।नरेंद्र और नजमा के दो छोटे छोटे बच्चे थे जिन्हें पुलिस ने नरेन्द्र के पिता को सौंप दिया था लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उन्होंने बच्चों की परवरिश में असमर्थता जताते हुए सामाजिक संगठनों से गुहार लगाई थी जिसमें संस्था द्वारा जाँच करने के बाद बच्चों को आगरा चाइल्ड केयर सेंटर में भेज दिया गया जहाँ से उन्हें कानपुर में भेज दिया गया और वर्तमान में वे वहीं हैं।

Agra UP । मासूम की हत्या के जुर्म में बेगुनाहों ने काटी पाँच साल चार महीने की जेल

विवेचक की लापरवाही

अभियोजन की ओर से कोर्ट में छह गवाह और 32 सुबूत पेश किए गए। अभियुक्त की ओर से गवाहों से जिरह अधिवक्ता वंशो बाबू ने की। उनकी जिरह में विवेचक ने कोर्ट में स्वीकार किया कि बच्चे की हत्या को लेकर भारी जनाक्रोश था। इस कारण यह जानने की कोशिश नहीं की गई कि किसके खिलाफ मुकदमा लिखा गया है? क्या रंजिश थी? भारी जन आक्रोश को देखते हुए नामजदों के खिलाफ आनन-फानन में विवेचना पूर्ण करके चार्जशीट लगा दी। दोनों को जेल भेजा गया था।

अदालत ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष यह है कि वास्तविक हत्यारोपी स्वच्छंद विचरण के लिए स्वतंत्र हैं, जबकि निर्दोषों को बिना वजह पांच साल से अधिक समय तक जेल में रहना पड़ा। इसके लिए निश्चित रूप से अभियोजन और विशेष रूप से विवेचक की उपेक्षात्मक व उदासीनता से परिपूर्ण विवेचना उत्तरदायी है।

अपर जिला जज ने एसएसपी को पत्र लिखकर विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश किए हैं। निर्दोषों को पांच साल तक जेल में रखने पर उन्हें बतौर प्रतिकर मुआवजा दिलाने का नोटिस भी जारी किया है। विवेचक अलीगढ़ की क्राइम ब्रांच प्रभारी ब्रह्म सिंह थे जो अब रिटायर्ड हो चुके हैं।