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Agra News: सैनिक का गंभीर बीमारी से हुआ निधन, तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा शव

संवाद जनवाद टाइम्स न्यूज

जैतपुर: जैतपुर क्षेत्र के अंतर्गत गांव कूकापुर निवासी सैनिक का गंभीर बीमारी कैंसर के चलते इलाज के दौरान अस्पताल में निधन हो गया। तिरंगे में लिपटा सैनिक का शव गांव पहुंचा ।गमगीन माहौल में अंतिम विदाई दी गई सलामी के साथ अंत्येष्टि हुई।प्राप्त जानकारी के अनुसार राजेश बाबू पुत्र स्वर्गीय रामस्नेही उम्र करीब 35 वर्ष निवासी कूकापुर थाना चित्राहाट जैतपुर सन 2005 में भारतीय सेना में आर्मडकोर में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के झांसी के बबीना में आर्मडकोर 54 में ड्यूटी पर तैनात थे। परिजनों के मुताबिक सन 2019 में जवान सैनिक राजेश बाबू की अचानक तबीयत खराब हो गई। जांच में गंभीर बीमारी कैंसर के बारे में जानकारी हुई। तब से उनका गंभीर बीमारी का इलाज चल रहा था। दिल्ली के अस्पताल में कई महीने इलाज चलने के बाद ड्यूटी करते हुए आगरा के मिलिट्री अस्पताल में इलाज चल रहा था। सैनिक की हालत बिगड़ने पर उसे मिलिट्री अस्पताल आगरा में इलाज को भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान गंभीर बीमारी कैंसर से जूझते हुए सैनिक जिंदगी की जंग हार गया। गुरुवार को सुबह साहसी सैनिक राजेश बाबू का निधन हो गया। जिससे परिवार सहित गांव शोक में डूब गया।

 

पोस्टमार्टम की कार्रवाई के बाद शुक्रवार को सैनिक का शव तिरंगे में लिपटा हुआ गांव पहुंचा तो सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों का सैनिक की अंतिम दर्शनों को हुजूम उमड़ पड़ा। वही सैनिक के शव के साथ सूबेदार दिनेश सिंह आर्मडकोर 54 सहित 50 पैरा बिग्रेड सैनिक गांव पहुंचे। जहां सभी सैनिकों ने जवान को अंतिम विदाई देते हुए सलामी दी। गमगीन माहौल में 14 वर्षीय पुत्र निखिल ने पिता के शव को मुखाग्नि देकर अंत्येष्टि की सूबेदार दिनेश ने बताया राजेश बाबू निडर और साहसी सैनिक थे गंभीर बीमारी से जूझते हुए भी कभी अपने आप को कमजोर महसूस नहीं किया।

 

Agra News: सैनिक का गंभीर बीमारी से हुआ निधन, तिरंगे में लिपटा गांव पहुंचा शव

सैनिक राजेश बाबू फ़ाइल फोटो

उन्होंने इकलौते 14 वर्षीय सैनिक के पुत्र निखिल को तिरंगा सौंपा। सैनिक के निधन पर पत्नी का रो रो कर बुरा हाल था सुध बुध खोकर परिजनों से रो रो कर कह रही थी अब भारतीय सेना के साहसी किस्से कौन सुनाएगा वहीं मां मुन्नी देवी अपने पुत्र की यादों को संजोए हुए गुम सुम बैठी थी। जवान के निधन से गांव में चूल्हे तक नहीं जले हर आंख नम थी परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था।

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