Uttar Pradesh : लॉक डाउन में छोटे व्यवसायियों का निकला दम

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ऋषि पाल सिंह : इटावा एक तरफ आम व्यापारी अपने व्यवसाय को लॉक डाउन होने के कारण लगभग 2 माह से अपना व्यवसाय बंद किए हुए बैठे हैं। लेकिन भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार अपने व्यवसाय को बढ़ाने के उद्देश्य से शराब बिक्री की कीमत कई गुना बढ़ा दी, डीजल और पेट्रोल की भी कीमत बढ़ा दी, जिससे दोनों सरकारों को अरबों रुपए का लाभ पहुंचेगा वही लॉक डाउन में प्रधानमंत्री राहत कोष में भेजे गए पैसे कहा कितने खर्च हुए आम जनता इसका कोई विवरण प्राप्त नहीं कर सकती। आखिर सरकार कब तक आम जनता की आंखों में धूल झोंकती रहेगी। 20000 करोड़ का आवास प्रधानमंत्री बनवा सकते हैं तथा प्रदेशो में केंद्र में आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस भाजपा कार्यालय बनवाए जा रहे हैं। यह जनता के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है, सरकार की नीतियां जनविरोधी है यह जीता जागता उदाहरण आज सबके सामने है की आम व्यापारी आम दुकानदार लगभग 2 महीने से दो पैसे नहीं कमा पा रहा है और सरकार अरबों की कमाई लोक डाउन की आड़ में करने में लगी हुई है। 10 साल से लेकर 65 साल का व्यक्ति घर में रहे उसे कौराना महामारी को रोकने के लिए लॉक डाउन का पालन करना है लेकिन देश में शराब के ठेकों पर कितना लॉक डाउन का पालन किया जा रहा है यह तो सुबह और शाम टीवी पर दिखाई दे रहा है 2 दिन में शराब के कारण कई घरों में मारपीट झगड़ा और यहां तक कई मौतें ग्रह कलेश के कारण हो चुकी हैं यह समाचार पत्रों में छपा भी है जनता को राहत देने वाली यह सरकार गरीबों को नशे की खुली छूट देकर आखिर किस ओर युवा पीढ़ियों को धकेलना चाहती है देश के युवा बेरोजगार हैं गरीब शिक्षा से वंचित होता चला जा रहा है आम आदमी अपनी आजीविका को चलाने के लिए पुलिस की लाठियां खा रहा है क्या इसी रामराज्य की कल्पना आम जनता ने की थी सरकार को चाहिए कि जब तक लॉक डाउन रहे तब तक के लिए शराब की दुकाने तत्काल बंद कर देनी चाहिए और शराबबंदी पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर पूर्णता उत्तर प्रदेश में शराब बंद कर देनी चाहिए। जिससे महामारी पर तथा गृह कलेश पर रोक लग सके।

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