संवाददाता मोहन सिंह बेतिया
भाकपा माले केन्द्रीय कमिटी सदस्य सह सिकटा विधायक वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर एससी आरक्षण के कोटे के भीतर उप-वर्गीकरण पर कोटा देने के सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले पर कड़ा विरोध जाहिर किया है।

आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अनुसूचित जातियों (एससी) के लिए आरक्षण के भीतर अलग-अलग श्रेणियां होना ठीक है, जो वास्तविक आंकड़ों पर आधारित हों और यह दशयि कि वे कितने हाशिए पर हैं, इसका मतलब है कि हमें विभिन्न जातियों की जनगणना करने की जरूरत है ताकि यह सटीक रूप से पता लगाया जा सके कि वे कितने वंचित हैं. जातीय जनगणना करना और फिर उसके आधार पर आरक्षण कोटा निर्धारित करना सभी हाशिए पर पड़े समूहों के लिए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है जिसे अभी करने की तत्काल जरूरत है ।इसके अलावा, इस फैसले ने राज्य सरकारों को उप-कोटा बनाने का अधिकार दिया है और अनुसूचित जाति आरक्षण के भीतर ‘क्रीमी लेयर की अवधारणा के उपयोग का सुझाव देकर इसके दायरे को बढ़ाने का दावा किया गया है और यह प्रस्ताव भी पेश किया गया है कि आरक्षण केवल एक पीढ़ी तक सीमित होना चाहिए।

एक सकारात्मक कार्रवाई के बतौर एससी आरक्षण का उद्देश्य भारत की दलित-आदिवासी आबादी द्वारा सामना किए जा रहे सामाजिक बहिष्कार और हाशिए पर रहने की निरंतर वास्तविकता का मुकाचला करना और उसे कम करना है. यह दावा करना गलत है कि यह भेदभाव केवल ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित है और शहरीकरण इस भेदभाव को कम करता है. यह भारतीय वास्तविकता का बिलकुल गलत चित्रण है, क्योंकि यहां एससी छात्रों और विद्वानों को प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के अन्य केंद्रों जैसे आईआईटी, आईआईएम और मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है.
आगे कहा कि सबसे वंचित लोगों को अधिक न्याय दिलाने के बहाने आरक्षण के संवैधानिक आधार को कमजोर करना स्वीकार्य नहीं है।

ऐसे दौर में जब आरक्षण प्रणाली, जिसका उद्देश्य सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देना है, को चुनौती दी जा रही है और यहां तक कि संविधान पर भी लगातार हमले हो रहे हैं, तब हमें समाज के सभी वंचित वर्गों के बीच और भी अधिक एकता और एकजुटता की जरूरत है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उत्पीड़ित और वंचितों के बीच और अधिक विभाजन और प्रतिद्वंद्विता न बढ़े, जिससे ताकतवर और विशेषाधिकार प्राप्त लोगों की अपने सामाजिक और आर्थिक प्रभुत्व को बनाए रखने की फूट डालो और राज करो की रणनीति को बढ़ावा मिले.।