संवाददाता: मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। 9 अगस्त को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय किसान महासभा की ओर से बेतिया में विरोध मार्च निकाला गया। इस दौरान भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को वापस लेने, कृषि भूमि की कथित लैंड पूलिंग के खिलाफ आवाज उठाने और यूरिया खाद की किल्लत व कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग की गई।

शहीद पार्क से जिला कलेक्ट्रेट तक निकाले गए मार्च के बाद आयोजित सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक वीरेंद्र गुप्ता ने कहा कि किसानों को गुलाम बनाने वाले भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को रद्द कराने के लिए आंदोलन तेज किया जाएगा। उन्होंने बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और उनमें लैंड पूलिंग नीति के माध्यम से कृषि भूमि के अधिग्रहण के प्रयास का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसान सरकार की किसान विरोधी नीतियों और अमेरिका परस्ती को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष सुनील कुमार राव ने कहा कि भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के जरिये देश की खेती पर बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। उनके अनुसार, इस समझौते के माध्यम से अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारतीय कृषि बाजार खोलने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पादों के आयात से छोटे और मध्यम किसानों की स्थिति और खराब हो सकती है तथा देश की खाद्य सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।
किसान महासभा के जिला सचिव इंद्रदेव कुशवाहा ने कहा कि संकटग्रस्त कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय सरकारें विकास के नाम पर कृषि भूमि को गैर-कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
किसान महासभा के राज्य पार्षद बिनोद यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और लैंड पूलिंग नीति के माध्यम से बड़े पैमाने पर कृषि भूमि को कॉरपोरेट हितों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है। वहीं किसान महासभा के जिला नेता संजय यादव ने ‘अनसर्वे लैंड’ के नाम पर बड़े पैमाने पर कृषि भूमि के अधिग्रहण की आशंका जताई।
किसान महासभा के जिला नेता सुजायत अंसारी ने कहा कि बिहार में कृषि भूमि पर आबादी का भारी दबाव है। उन्होंने कहा कि हाईवे और औद्योगिक कॉरिडोर के नाम पर पहले ही बड़ी मात्रा में कृषि भूमि प्रभावित हो चुकी है। ऐसे में बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का गैर-कृषि इस्तेमाल भविष्य में खाद्यान्न संकट के साथ पर्यावरणीय असंतुलन का कारण बन सकता है।
किसान नेता अब्दुल खैर ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने के लिए किसानों को सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी। उन्होंने यूरिया खाद की किल्लत और कथित कालाबाजारी का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
कार्यक्रम में किसान नेता एवं पूर्व मुखिया रामबाबू महतो, मुखिया संघ के अध्यक्ष नवीन कुमार, एक्टू के जिला अध्यक्ष जवाहर प्रसाद, इनौस के जिला अध्यक्ष फरहान राजा, हरे राम यादव, मंगल यादव, कलाम अंसारी, इस्लाम अंसारी, संजय राम, अच्छे लाल राम, सीताराम राम, हारुन गद्दी, बिनोद कुशवाहा, जोखू चौधरी, अशोक कुशवाहा, भरत शर्मा, सुरेंद्र चौधरी, शौकत अली, मुन्ना अंसारी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।