संवाददाता : मोहन सिंह
बेतिया/पश्चिमी चंपारण। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिले में टीबी मरीजों को बेहतर उपचार एवं पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को अनुमंडलीय अस्पताल बगहा, अनुमंडलीय अस्पताल नरकटियागंज, जिला यक्ष्मा केंद्र बेतिया तथा सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कुल 183 टीबी मरीजों के बीच ‘पोषण पोटली’ का वितरण किया गया।

इसी क्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मझौलिया में आयोजित कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह ने भाग लिया। उन्होंने 14 टीबी मरीजों को पोषण पोटली प्रदान कर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान जिला पदाधिकारी ने मरीजों से बातचीत कर उनके स्वास्थ्य एवं उपचार की जानकारी ली। उन्होंने मरीजों को सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही दवाओं का नियमित सेवन करने तथा चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार पूरा उपचार लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। नियमित दवा, पौष्टिक आहार और चिकित्सकीय निगरानी से मरीज पूर्णतः स्वस्थ हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि टीबी के उपचार में दवाओं के साथ-साथ संतुलित एवं पौष्टिक आहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मरीजों को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीनयुक्त भोजन का सेवन करना चाहिए। जो मरीज अंडा नहीं खाते हैं, वे सोयाबीन, दाल तथा अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों का सेवन कर सकते हैं।
जिला पदाधिकारी ने मरीजों से अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने तथा किसी भी प्रकार की समस्या होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की। उन्होंने कहा कि टीबी संक्रमण की रोकथाम के लिए मरीज के परिवार के अन्य सदस्यों की भी जांच कराना आवश्यक है। साथ ही मास्क का उपयोग, खांसते एवं छींकते समय सावधानी बरतने तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा बताए गए सभी सुरक्षा उपायों का पालन करने की सलाह दी।
उन्होंने चिकित्सा प्रभारी (एमओआईसी) को निर्देश दिया कि सभी टीबी मरीजों का नियमित एवं प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए। यह भी निगरानी रखी जाए कि मरीज नियमित रूप से दवा ले रहे हैं या नहीं। उपचार के दौरान यदि किसी प्रकार की समस्या सामने आती है तो उसका त्वरित समाधान किया जाए।
जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि टीबी मरीजों को पोषण पोटली के साथ उपचार एवं पोषण संबंधी आवश्यक परामर्श भी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान, नियमित उपचार, पौष्टिक आहार और जन-जागरूकता के माध्यम से ही जिले को टीबी मुक्त बनाया जा सकता है।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त काजले वैभव नितिन, सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार, विशेष कार्य पदाधिकारी (जिला गोपनीय शाखा) सुजीत कुमार, एसीएमओ डॉ. रमेश चंद्रा, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. आर.एस. मुन्ना सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।