संवाददाता – विजय कुमार
प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)
05 अप्रैल 2026
प्रयागराज । उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज में शनिवार को “इंप्लीमेंटिंग ग्रेजुएट एम्प्लायबिलिटी एंड नेशनल स्किल्स क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क” विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर अशोक गाबा ने कहा कि कौशल विकास पाठ्यक्रमों के माध्यम से ही भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में कौशल आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इससे युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाना संभव है।
उन्होंने बताया कि देश के सभी 17 मुक्त विश्वविद्यालय कौशल विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही यह भी सुझाव दिया कि किसी भी कौशल आधारित कोर्स को तैयार करने से पहले स्थानीय और क्षेत्रीय उद्योगों से परामर्श लिया जाना चाहिए, ताकि युवाओं को 100% रोजगार के अवसर मिल सकें।

विशिष्ट अतिथि अमित शर्मा ने राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद के गठन, महत्व और कार्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह संस्था कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण को विनियमित करने का कार्य करती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने कहा कि वर्तमान समय कौशल का युग है। उन्होंने जानकारी दी कि विश्वविद्यालय में अब प्रत्येक पाठ्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को शामिल किया गया है, जिससे छात्र हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में आधुनिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि कौशलयुक्त युवा ही उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम के समन्वयक प्रोफेसर देवेश रंजन त्रिपाठी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन डॉ. त्रिविक्रम तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर एस. कुमार द्वारा किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोध छात्र और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।