Etawah News : सहकारी शिक्षा सम्मेलन का आयोजन, प्राकृतिक खेती व मृदा परीक्षण पर दिया जोर

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संवाददाता : मनोज कुमार 
जसवंतनगर : विकास खंड क्षेत्र के ग्राम अजनौरा में शुक्रवार को सहकारी शिक्षा सम्मेलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में ग्राम प्रधान सहित करीब एक सैकड़ा किसानों व ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों को सहकारिता विभाग की योजनाओं, उन्नत कृषि तकनीकों तथा प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपर जिला सहायक अधिकारी (सहकारिता) इटावा सदर राकेश कुमार उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में सहायक विकास अधिकारी (कृषि) ब्लॉक जसवंतनगर सुरेंद्र सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी कृभको इटावा राजीव कुमार एवं ग्राम प्रधान अजनौरा मनोज कुमार शामिल रहे। अतिथियों का ग्रामीणों द्वारा माल्यार्पण कर स्वागत किया गया।

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मुख्य अतिथि राकेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता विभाग किसानों को संगठित कर आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सहकारी समितियों से जुड़कर सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने बताया कि उर्वरकों के संतुलित प्रयोग एवं मृदा परीक्षण के आधार पर खेती करने से उत्पादन में वृद्धि के साथ लागत में भी कमी आती है।
सहायक विकास अधिकारी (कृषि) सुरेंद्र सिंह ने किसानों को मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि विस्तार से समझाई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक किसान को अपनी भूमि का मृदा परीक्षण अवश्य कराना चाहिए, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की सही जानकारी मिल सके और उसी आधार पर उर्वरकों का प्रयोग किया जा सके। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के लाभों पर भी प्रकाश डाला।
क्षेत्रीय अधिकारी कृभको राजीव कुमार ने कृभको के विभिन्न उर्वरक एवं जैविक उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती एवं जैविक उत्पादों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है तथा फसल की गुणवत्ता में सुधार होता है। किसानों को जैव उर्वरकों और नैनो उर्वरकों के उपयोग की भी जानकारी दी गई।
ग्राम प्रधान मनोज कुमार ने सभी अधिकारियों एवं किसानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम गांव में किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कराने का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम के अंत में किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कई किसानों ने फसल उत्पादन, उर्वरक उपलब्धता तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित प्रश्न पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से उत्तर दिया। अंत में सभी किसानों से अपील की गई कि वे आधुनिक तकनीक अपनाकर एवं सहकारी योजनाओं से जुड़कर खेती को लाभकारी

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